कुमार विश्वास ने केजरीवाल का नाम लिए बिना कहा था कि वो आदमी लगातार अलगाववाद के सहारे पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहता था। 

चंडीगढ़। पंजाब में चुनाव से पहले चर्चित कवि और पूर्व आप नेता कुमार विश्वास के दावे ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। कुमार ने हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर अलगाववादियों और खालिस्तानी ताकतों की मदद से भी सरकार बनाने का सनसनीखेज आरोप लगाया था। कुमार विश्वास ने केजरीवाल का नाम लिए बिना कहा था कि वो आदमी लगातार अलगाववाद के सहारे पंजाब का मुख्यमंत्री बनना चाहता था। इतना ही नहीं, केजरीवाल आप के प्रत्याशियों को ही आपस में लड़वा कर मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। कुमार विश्वास के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस लगातार अरविंद केजरीवाल पर हमलावर है।

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जानिए कुमार विश्वास का शब्दश: बयान 
‘‘मैं हमेशा से मानता रहा हूं कि पंजाब एक राज्य नहीं, बल्कि एक इमोशन है। पंजाबियत एक भावना है। ऐसे में एक ऐसा आदमी अलगाववादी संगठनों, खालिस्थानी समर्थकों का साथ ले रहा था। जब मैंने उससे कहा कि इनका साथ मत ले तो उसने मुझसे कहा कि नहीं-नहीं तू चिंता मत कर। हो जाएगा। मैंने पूछा कि इनका साथ लेकर कैसे मुख्यमंत्री बनेंगे तो उसने मुझे इसका फॉर्मूला भी बताया कि ऐसे-ऐसे भगवंत मान (वर्तमान सीएम कैंडिडेट) और फुल्का जी (एचएच फुल्का) को लड़वा दूंगा और आज भी वो उसी पथ पर है। मानो तो मानो नहीं तो वो पपेट बिठा देगा। कोई कुछ कर लेगा वो। मुझे उसने इतनी भयानक बातें बोलीं, जो कि पंजाब में सबको पता हैं। एक दिन तो मुझसे बोला कि तू चिंता मत कर, या तो मैं एक स्वतंत्र सूबे का मुख्यमंत्री बनूंगा। मैंने कहा कि ये अलगाववाद... 2020 का रेफरेंडम आ रहा है। आईएसआई (ISI) से लेकर पूरी दुनिया फंडिंग कर रही है। तो बोला कि तो क्या हुआ। स्वतंत्र देश का पहला प्रधानमंत्री बनूंगा। विश्वास ने कहा कि इस आदमी में सत्ता का ऐसा लालच है कि बस सरकार बननी चाहिए। भले ही अलगाववाद सहारे बने।’’

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पंजाब चुनाव : अलगाववादियों के सहारे पंजाब का CM बनना चाहता था वो, केजरीवाल को लेकर कुमार विश्वास का बड़ा आरोप

कौन हैं कुमार विश्वास
कुमार विश्वास हिंदी कवि, वक्ता और सामाजिक-राजनैतिक कार्यकर्ता हैं। वे आम आदमी पार्टी में भी रह चुके हैं। अन्ना हजारे के आंदोलन के वक्त कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल एक साथ आए। इसके बाद विश्वास कुछ समय तक केजरीवाल की पार्टी में काम करते रहे। कहा जाता है कि कुमार राज्यसभा जाना चाहते थे, लेकिन केजरीवाल ने उन्हें राज्यसभा के लिए नहीं चुना। इस वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ दी और अब वह राजनीति से दूर होकर सिर्फ कवि के तौर पर मंच संभाल रहे हैं।

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वीडियो क्लिप नहीं चलाने का आदेश देने वाले सीईओ पर कार्रवाई हो सकती है
इस पूरे विवाद में पंजाब के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी डीपीएस खरबंदा भी आ गए हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों और मीडिया को कुमार विश्वास के बयान की वीडियो क्लिप नहीं चलाने के लिए आदेश जारी किए थे। जिसे पंजाब सीईओ कार्यालय ने कुछ घंटे के भीतर ही वापस ले लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव आयोग की जानकारी के बिना अतिरिक्त सीईओ ने यह आदेश जारी किया था। इस आदेश को अनुमोदित भी नहीं किया गया था। चुनाव आयोग ने मामले को गंभीरता से लिया है। पत्र जारी करने वाले अतिरिक्त सीईओ के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।