
नई दिल्ली. निर्भया के दरिंदों को फांसी दिलाने के लिए एक ओर जहां निर्भया की मां आशा देवी पिछले सात सालों से लडाई लड़ रही हैं। जिसमें उन्हें 7 जनवरी को सफलता भी लगी जब दिल्ली पटियाला कोर्ट ने 22 जनवरी 2020 को सुबह 7 बजे फांसी की तारीख तय की। जिसके बाद न्याय के लिए पूरे देश का इंतजार समाप्त हुआ। लेकिन दोषियों ने कानून प्रक्रिया में मामले को उलझा कर तारीख को टलवा लिया। जिसके बाद कोर्ट ने अब 1 फरवरी 2020 को सुबह 6 बजे फांसी की तारीख तय की है। इन सब के बीच देश की जानी मानी सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की मां से एक हैरान करने वाली अपील की है। जिसमें उन्होंने निर्भया की मां से कहा है कि वह दोषियों को माफ कर दें।
क्या कहा जयसिंह ने ?
देश की जानी मानी वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने ट्वीट कर लिखा, "हम आशा देवी के दर्द को पूरी तरह से समझते हैं। मैं उनसे निवेदन करती हूं कि वह सोनिया गांधी को फॉलो करते हुए दोषियों को माफ कर दें।" जैसे उन्होंने (सोनिया) नलिनी सिंह को माफ कर दिया था। जयसिंह ने कहा, "उन्होंने (सोनिया) नलिनी के लिए मौत की सजा नहीं चाहती थीं। हम आपके साथ है पर मौत की सजा के खिलाफ।"
कौन है नलिनी
1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हुई हत्या में नलिनी दोषी हैं। जिन्हें कोर्ट द्वारा मृत्युदंड सुनाया गया था। लेकिन 24 अप्रैल, 2000 को तमिलनाडु सरकार ने मौत की सज़ा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। नलिनी पिछले 27 साल से ज़्यादा वक्त से जेल में ही कैद हैं।
जारी हुआ है नया डेथ वारंट
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों को फांसी देने का नया डेथ वारंट जारी किया है। नए वारंट में निर्भया के दोषियों विनय शर्मा (26), मुकेश कुमार (32), अक्षय कुमार सिंह (31) और पवन कुमार गुप्ता को 1 फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाया जाएगा। इससे पहले पटियाला कोर्ट ने 22 जनवरी को सुबह 6 बजे फांसी पर लटकाए जाने की तारीख मुकर्रर की थी। इस तारीख सामने आने के बाद निर्भया के दोषियों ने क्यूरेटिव याचिका और दया याचिका दायर की थी। इन तमाम कानूनी अड़चनों के कारण पटियाला कोर्ट ने फांसी की तारीख को आगे बढ़ाई है।
अभी बचे हैं यह विकल्प
इससे पहले शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी निर्भया के गुनहगार मुकेश कुमार की दया याचिका को खारिज कर दिया है। हालांकि अभी निर्भया के तीन गुनहगारों के पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प बचा हुआ है।
इससे पहले निर्भया के दोषी अक्षय और पवन के पास सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने का भी विकल्प है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने 14 जनवरी को दो दोषियों विनय और मुकेश की क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया था।
क्या हुआ था 16 दिसंबर को?
16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया कांड ने पूरे देश को झंकझोर कर रख दिया था। 23 वर्षीय निर्भया के साथ चलती बस में गैंगरेप किया गया था और उसकी बुरी तरफ पिटाई की थी। दरिंदगी की हदों को पार करते हुए दोषियों ने निर्भया के प्राइवेट पार्ट में लोहे की रॉड डाल दी थी। जिससे उसकी आंत बूरी तरह से जख्मी हो गई बाद में अस्पताल में निर्भया की मौत हो गई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से एक नाबालिग था। नाबालिग को किशोर अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जबकि राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। इसके अलावा बाकी 4 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई है।
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