कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में हल्की हुई बर्फबारी, तापमान बढ़ने से लोगों को मिली राहत

Published : Jan 04, 2020, 03:46 PM IST
कश्मीर घाटी के कई हिस्सों में हल्की हुई बर्फबारी, तापमान बढ़ने से लोगों को मिली राहत

सार

केंद्र - शासित क्षेत्रों में बादल छाए रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ हल्की से मध्यम बर्फबारी छह से सात जनवरी की शाम में हो सकती है।’’

श्रीनगर: कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में शनिवार को ताजा हल्की बर्फबारी हुई, जिससे न्यूनतम तापमान बढ़ा और लोगों को कड़ाके की ठंड से राहत मिली।

मौसम विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र में आसमान में बादल छाए रहेंगे और इस दौरान हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘ कश्मीर में कई स्थानों, जम्मू के पर्वतीय क्षेत्रों और लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दो से पांच इंच तक की बर्फबारी हुई।’’

बर्फबारी से घाटी में रहनेवाले को राहत मिलेगी-

अधिकारी ने बताया कि शनिवार को दोनों ही केंद्र - शासित क्षेत्रों में बादल छाए रहेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ हल्की से मध्यम बर्फबारी छह से सात जनवरी की शाम में हो सकती है।’’ अधिकारी ने बताया कि ताजा बर्फबारी से घाटी में रहनेवाले लोगों को कड़ाके की ठंड से राहत मिली है और रात के तापमान में भी सुधार हुआ।

जम्मू कश्मीर के अलग अलग क्षेत्रों का तापमान-

श्रीनगर में शुक्रवार रात में तापमान शून्य से 0.1 डिग्री सेल्सियस तापमान नीचे दर्ज किया गया, जो कि बृहस्पतिवार रात में शून्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। उत्तरी कश्मीर के गुलमार्ग के स्की रिसॉर्ट में तापमान रात में शून्य से 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि पिछली रात से दो डिग्री सेल्सियस अधिक था। पहलगाम क्षेत्र में शुक्रवार रात में तापमान शून्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया। लद्दाख के लेह में तापमान शून्य से 18.3 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया।

(यह खबर समाचार एजेंसी भाषा की है, एशियानेट हिंदी टीम ने सिर्फ हेडलाइन में बदलाव किया है।)

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

Delhi Red Fort Blast: डॉक्टर, प्रोफेसर और मौलवी ने कैसे बुनी साजिश? NIA रिमांड पर उगलेंगे राज़
गैंगस्टर अबू सलेम को 14 दिन की पैरोल देने से सरकार का इनकार, अब क्या बचा आखिरी रास्ता?