
लोकसभा चुनाव 2024। भाजपा ने जैसे ही लोकसभा चुनावों के लिए 195 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की, सूची में कुछ पुराने लोग जगह बनाने में असफल साबित हुए। इन नेताओं में फायरब्रांड नेता प्रज्ञा ठाकुर और दिल्ली के मौजूदा सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा और रमेश बिधूड़ी शामिल हैं। बीजेपी ने तीनों नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने के साथ ही बाकी के सांसदों को कड़ा संदेश दिया है।
बीजेपी संदेश देना चाहती है कि वो चुनाव से पहले कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है, जिसकी वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़े। क्योंकि, जिन तीन नेताओं की बात यहां पर की जा रही है वो विवादित बयानों की वजह से सुर्खियों में बने रहते हैं।
बीजेपी ने इस बार पासा पलटते हुए भोपाल में प्रज्ञा ठाकुर की जगह आलोक शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा पश्चिमी दिल्ली के सांसद परवेश साहिब सिंह वर्मा का टिकट काट दिया गया। उनकी जगह पर कमलजीत सहरावत को टिकट दिया गया है। वहीं दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी का टिकट काट कर उनकी जगह रामवीर बिधूड़ी को जगह दिया गया है। ये तीनों के तीनों कभी न कभी विवादित बयानों की वजह से चर्चा में थे।
प्रज्ञा भारती के टिकट कटने की संभावित वजह
भोपाल से सांसद प्रज्ञा भारती ने एक बार महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहा था। इस टिप्पणी पर किसी और ने नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। पीएम ने कहा था कि गांधीजी या नाथूराम गोडसे के बारे में की गई टिप्पणी बहुत खराब है और समाज के लिए बहुत गलत है। उन्होंने माफी मांगी है, लेकिन मैं उन्हें कभी भी पूरी तरह माफ नहीं कर पाऊंगा।
इसके अलावा प्रज्ञा भारती 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में आरोपी भी है. उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर जमानत दी गई थी, लेकिन उन्हें कबड्डी और गरबा खेलते देखा गया था। इसके अलावा उन्होंने 2008 के आतंकवादी हमलों के दौरान शहीद हुए मुंबई एटीएस के पूर्व प्रमुख हेमंत करकरे पर विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि उसके श्राप के कारण उसकी हत्या कर दी गई।
परवेश साहिब सिंह वर्मा के टिकट कटने की संभावित वजह
भाजपा की सूची में एक नाम जिसका है वो परवेश साहिब सिंह वर्मा है, जिसका नाम काट दिया गया है। ये पश्चिमी दिल्ली से दो बार के सांसद रह चुके हैं और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा के बेटे हैं. वो अपनी भड़काऊ टिप्पणियों के कारण चर्चा में रहते हैं। 2020 के दिल्ली चुनावों से पहले वर्मा ने शाहीन बाग विरोध के दौरान विवादास्पद टिप्पणी की थी और कहा था कि अगर भाजपा राष्ट्रीय राजधानी में सत्ता में आई तो प्रदर्शनकारियों को एक घंटे में हटा दिया जाएगा।
इसके बाद साल 2022 में वर्मा फिर से सुर्खियों में आए। इस बार उन्होंने मुसलमानों को निशाना बनाते हुए कहा था कि आप उन्हें जहां भी देखें तो उनका बहिष्कार करें।
दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी
दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी ने पिछले साल सितंबर में लोकसभा में एक चर्चा के दौरान अमरोहा के सांसद दानिश अली के खिलाफ इस्लामोफोबिक अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, उन्होंने बाद में माफी मांगी थी, लेकिन सूची से नाम काटे जाने पर यही लगता है कि बीजेपी ने उन्हें माफ नहीं किया है।
2024 के चुनावों में भाजपा के लक्ष्य स्पष्ट हैं कि वो किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहते है. प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत @2047 के आह्वान पर ध्यान केंद्रित रखना चाहते हैं. इसके वजह से वो ये नहीं चाहते कि उसके नेता ऐसे बयान दें जो विपक्ष के लिए चारा का काम करें और सत्तारूढ़ दल को शर्मिंदा करें।
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