
भोपाल. मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन का 21 जुलाई की सुबह निधन हो गया। वे 85 साल के थे। टंडन को 11 जून को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में सांस लेने में तकलीफ होने के बाद भर्ती कराया गया था।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, लालजी टंडन के बेटे ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। आशुतोष टंडन ने लिखा, बाबूजी नहीं रहे।
पीएम मोदी ने निधन पर जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर लिखा, लालजी टंडन संवैधानिक मामलों के अच्छे जानकार थे। वे अटल जी के करीबी थे, उनके साथ लंबे वक्त तक रहे। दुख की इस घड़ी में लालजी टंडन के परिवार और शुभचिंतकों को मेरी संवेदनाएं।
उन्होंने आगे लिखा, लालजी टंडन को समाज की सेवा लिए उनके अथक प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश में भाजपा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने एक प्रभावी प्रशासक के रूप में अपनी पहचान बनाई, हमेशा लोक कल्याण को महत्व दिया। उनके निधन से दुखी हूं।
13 जून को हुआ था ऑपरेशन
लालजी टंडन का 13 जून को ऑपरेशन किया गया था। वे तभी से वेंटिलेटर पर थे। टंडन की किडनी फंक्शन में समस्या थी। ऐसे में डायलिसिस करनी पड़ी थी। इसके बाद लिवर फंक्शन भी गड़बड़ हो गया था।
हालचाल लेने पहुंचे थे योगी आदित्यनाथ
14 जून को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अस्पताल पहुंचकर राज्यपाल लालजी टंडन का हालचाल जाना था।
भाजपा के वरिष्ठ नेता थे लालजी टंडन
भाजपा के सीनियर लीडर लालजी टंडन इससे पहले बिहार के राज्यपाल थे। 12 अप्रैल 1935 को जन्मे लालजी टंडन उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा नाम माने जाते थे। वे कई बार प्रदेश सरकार में मंत्री रहे। टंडन ने अपनी राजनीति यात्रा 1960 में शुरू की थी। वे मायावती और कल्याण सिंह की कैबिनेट में नगर विकास मंत्री रहे। टंडन जेपी आंदोलन का भी हिस्सा रहे।
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