
Manipur Violence. मणिपुर के कांगपोकपी जिले में भीड़ ने आर्मी की दो बसों को रोककर आग लगा दी है। अधिकारियों के अनुसार इन बसों से सुरक्षा बलों को ले जाने का काम किया जाता था। कांगपोकपी जिले में उग्र भीड़ ने इन दोनों बसों को आग के हवाले कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है।
मणिपुर में आर्मी की दो बसें फूंकी
रिपोर्ट्स के अनुसार मणिपुर के कांगपोकपी जिले के सपोरमीना में मंगलवार की शाम को दीमापुर से आ रही आर्मी बस को पहले रोका गया फिर उसमें आग लगाई गई। मणिपुर हिंसा में शामिल दो समुदायों में से एक समुदाय की उग्र भीड़ ने यह किया है। यह दोनों बसें मणिपुर के ही रजिस्ट्रेशन नंबर की हैं। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भीड़ ने पहले बस को रोका और कहा कि इसकी जांच करेंगे। वे दूसरे समुदाय के लोगों की जांच करना चाहते थे, तभी भीड़ में से किसी ने बस में आ लगा दी।
मणिपुर में 24 जून को भी सुरक्षा बलों को बनाया निशाना
इससे पहले मणिपुर में बीते 24 जून को सुरक्षा बलों को भीड़ ने निशाना बनाया था। तब भारतीय सेना द्वारा कहा गया था कि सुरक्षा बलों की टीम को इथम गांव में घेर लिया गया। तब भीड़ की संख्या करीब 1500 थी। उन्होंने सुरक्षाबलों को 12 उग्रवादियों को रिहा करने पर मजबूर कर दिया। उस भीड़ का नेतृत्व महिलाएं ही कर रही थीं। सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के बाद 12 उग्रवादी गिरफ्तार किए थे लेकिन भीड़ उन्हें छुड़ाने में कामयाब रही।
मणिपुर में 3 मई से हिंसा की शुरूआत
मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा की शुरूआत हुई। इस जातीय हिंसा में बीते 3 महीनों के दौरान करीब 160 लोगों की जान जा चुकी है। यह मामला मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग के विरोध में शुरू हुई, जिसने धीरे-धीरे हिंसा का रुप ले लिया। जानकारी के लिए बता दें कि मणिपुर में मैतेई की संख्या करीब 53 प्रतिशत है जबकि कुकी जनजाति 40 प्रतिशत हैं।
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