
नई दिल्ली। आर्थिक सुधारों के जनक और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का गुरुवार रात दिल्ली में निधन हो गया। वे 92 वर्ष के थे। एक अर्थशास्त्री से प्रधानमंत्री तक का सफर तय करने वाले डॉ. मनमोहन सिंह अपने मृदुभाषी व्यवहार, शालीनता और शॉर्प इकोनॉमिक विजन के लिए जाने जाते थे। कई मौकों पर विरोधी और प्रतिद्वंद्वियों ने भी दिल खोलकर उनकी प्रशंसा की। साल 2024 की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के रिटायर सदस्यों को विदाई देने के एक कार्यक्रम के दौरान मनमोहन सिंह की तारीफ की थी। बता दें कि 3 अप्रैल, 2024 को मनमोहन सिंह 33 साल का संसदीय कार्यकाल खत्म हुआ था।
वे वोट देने नहीं, लोकतंत्र को ताकत देने आए थे..
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक अहम विधेयक पर मनमोहन सिंह द्वारा डाले गए वोट का जिक्र करते हुए कहा था- मुझे याद है.. सदन में वोटिंग के दौरान हर कोई ये जानता था कि सत्ता पक्ष जीतेगा, लेकिन डॉ. मनमोहन सिंह व्हीलचेयर पर आए और अपना वोट डाला। एक सांसद अपने दायित्व के लिए कितना सजग है, उसका वे उदाहरण थे। सवाल ये नहीं है कि वे किसको ताकत देने के लिए आए थे...मैं मानता हूं कि वे लोकतंत्र को ताकत देने के लिए आए थे। जब भी लोकतंत्र की चर्चा होगी तो जिन माननीय सदस्यों को याद किया जाएगा, उसमें डॉ. मनमोहन सिंह के योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
सदन और देश के लिए उनका मार्गदर्शन हमेशा याद रहेगा
पीएम मोदी ने मनमोहन सिंह को याद करते हुए कहा था- नेता के रूप में भी और प्रतिपक्ष में एक नेता के तौर पर उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। वैचारिक मतभेद, कभी बहस में छीटाकशी बहुत अल्पकालीन होता है। लेकिन इतने लंबे समय तक जिस प्रकार से उन्होंने इस सदन का और देश का मार्गदर्शन किया है, वो हमेशा-हमेशा याद किया जाएगा। बता दें कि अगस्त 2023 में डॉ. मनमोहन सिंह ने दिल्ली के प्रशासनिक मामलों पर केंद्र सरकार को और ज्यादा अधिकार देने के लिए एक विधेयक पर संसदीय बहस में भाग लिया और व्हीलचेयर पर पहुंचे। वे राष्ट्रपति चुनाव के दौरान अपना वोट डालने के लिए भी व्हीलचेयर पर ही गए थे।
राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा- गडकरी
2022 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा था कि राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा। गडकरी ने कहा- उदारवादी अर्थव्यवस्था के कारण देश को नई दिशा मिली, उसके लिए देश मनमोहन सिंह का ऋणी है। उन्होंने याद किया कि 1990 के दशक के मध्य में जब वे महाराष्ट्र में मंत्री थे, तो पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए आर्थिक सुधारों के चलते ही वो महाराष्ट्र में सड़कें बनाने के लिए धन जुटा पाए थे।
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