भारत को मिल गई स्विस बैंक अकाउंट होल्डर्स की लिस्ट, अब सरकार लेने जा रही यह एक्शन

Published : Oct 07, 2019, 06:44 PM ISTUpdated : Oct 07, 2019, 07:16 PM IST
भारत को मिल गई स्विस बैंक अकाउंट होल्डर्स की लिस्ट, अब सरकार लेने जा रही यह एक्शन

सार

ब्लैक मनी के बारे में जानकारी हासिल करने के मामले में मोदी सरकार ने बड़ी सफलता हासिल की है। स्विट्जरलैंड सरकार ने बैंक खातों से संबंधित पहली जानकारी भारत सरकार को सौंप दी है। भारत उन कुछ देशों में से एक है जिन्हें यह जानकारी मिल रही है।

नई दिल्ली. ब्लैक मनी के बारे में जानकारी हासिल करने के मामले में मोदी सरकार ने बड़ी सफलता हासिल की है। स्विट्जरलैंड सरकार ने बैंक खातों से संबंधित पहली जानकारी भारत सरकार को सौंप दी है। भारत उन कुछ देशों में से एक है जिन्हें यह जानकारी मिल रही है। स्विट्जरलैंड के कर विभाग के अनुसार, अगली जानकारी 2020 में भारत सरकार को दी जाएगी।

75 देशों के 31 लाख खाते हैं

जानकारी के अनुसार, स्विट्जरलैंड में दुनिया के 75 देशों के लगभग 31 लाख खाते हैं। इसमें भारत के कई खातें हैं। स्विट्जरलैंड सरकार से जानकारी प्राप्त करने के बाद, सरकारी सूत्रों का कहना है कि जो जानकारी मिली है, उसमें सभी खाते अवैध नहीं हैं।

सरकार क्या एक्शन लेगी?

सरकारी एजेंसियां ​​अब इस मामले में एक जांच शुरू करेंगी, जिसमें खाताधारकों के नाम, उनके खाते की जानकारी साझा की जाएगी और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। 

2014 में था बड़ा चुनावी मुद्दा 

विदेशों में जमा काले धन को लाना मोदी सरकार के लिए एक बड़ा मुद्दा रहा है। चाहे वह 2014 के चुनाव हों या 2019 के चुनाव हों, स्विट्जरलैंड की सरकार से लगातार सरकार द्वारा जानकारी जुटाने के लिए संपर्क किया जा रहा था। कालेधन के खिलाफ इस लड़ाई में अब मोदी सरकार को सफलता मिली है। जून 2019 में स्विस बैंक की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि स्विस बैंक में 2018 के आंकड़ों के अनुसार भारतीयों का 6757 करोड़ रुपए स्विस बैंक में जमा हैं।

PREV

National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.

Recommended Stories

Delhi Red Fort Blast: डॉक्टर, प्रोफेसर और मौलवी ने कैसे बुनी साजिश? NIA रिमांड पर उगलेंगे राज़
गैंगस्टर अबू सलेम को 14 दिन की पैरोल देने से सरकार का इनकार, अब क्या बचा आखिरी रास्ता?