
INDIA GDP Growth. केंद्र सरकार का कहना है कि 2023-24 के वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े शानदार हैं। इस तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध से उपजे हालातों के बीच भार की जीडीपी ने लंबी छलांग लगाई है। जानकारी के लिए बता दे कि पिछली तिमाही यानि जनवरी-मार्च के बीच जीडीपी की ग्रोथ रेट सिर्फ 6.1 प्रतिशत थी। जो कि जून-अगस्त की तिमाही में 13.1 फीसदी तक बढ़ी है। यह देश के लिए एक तरह से गुड न्यूज है।
कैसे लगाया जाता है जीडीपी का अनुमान
जीडीपी की ग्रोथ रेट की बात करें तो यह ज्यादातर स्ट्रीट अनुमान के हिसाब से ही सामने आया है। इकोनॉमिस्ट ने यह प्रेडिक्शन किया था कि सर्विस सेक्टर और अधिक पूंजीगत व्यय के कारण भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे तेज आर्थिक विकास हुआ है। यह दर बताती है कि कोरोना काल के बाद भारत ने तेजी से अपनी आर्थिक गतिविधियां शुरू कीं, जिसके परिणाम स्वरूप जीडीपी में भी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
क्या कहते हैं भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े
आरबीआई यानि भारतीय रिजर्व बैंक का डाटा यह कहता है कि अप्रैल-जून में भारत की जीडीपी में 7 प्रतिशत से ज्यादा रहने का अनुमान लगाया गया था। इसके परोक्ष ग्रास डोमेस्टिक प्रोडक्ट यानि कि सकल घरेलू उत्पाद को देखेंगे तो यह काफी हद तक संतोषजनक है। सकल घरेलू उत्पाद को देश में पैदा होने वाली सर्विसेज और प्रोडक्ट्स के कुल मूल्य के आधार पर तय किया जाता है।
कैसी है भारत की अर्थव्यवस्था
मौजूदा जीडीपी के आधार पर भारत की इकोनॉमी को तौलेंगे तो यह पता चलेगा कि अर्थव्यवस्था ने कैसा प्रदर्शन किया है। अगर जीडीपी की रेट कम होती है तो यह माना जाता है कि अर्थव्यस्था ने बेहतर प्रदर्शन नहीं किया है लेकिन यह रेट ज्यादा होती है तो यह पता चलता है इकोनॉमी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। भारत जैसे बड़े देश की बात करें तो यह क्लियर है कि यहां की अर्थव्यवस्था ठीक है तो दुनिया को यह पता चलता है कि इतनी बड़ी आबादी को यह देश संभालने में सक्षम है।
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