
Himachal Monsoon Disaster: हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून कहर बनकर टूटा है। बीते कुछ दिनों से राज्य में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी आपदाओं के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 20 जून से शुरू हुए मानसून के बाद से अब तक राज्य में 78 लोगों की जान जा चुकी है। इतने लोगों की मौत एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
SDMA द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इन मौतों में से 50 लोग पर भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं। वहीं 28 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई है, जो कि भारी बारिश और खराब मौसम के कारण हुए।
SDMA के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक 23 बार बाढ़, 19 बार बादल फटने और 16 बार भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। हर घटना अपने पीछे तबाही का मंजर छोड़ गई है। अचानक पानी का बहाव, टूटती सड़कें, बहते मकान और बिखरते जीवन – हिमाचल के कई जिलों में यही हालात हैं।
मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है, जहां अकेले 17 लोगों की जान गई है। इसके बाद कांगड़ा जिले में 11 मौतें, जबकि शिमला, कुल्लू और चंबा में भी तीन-तीन लोग बारिश की तबाही का शिकार बने हैं। इन मौतों की वजह केवल भूस्खलन या बाढ़ नहीं है। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ लोगों की जान बिजली गिरने, डूबने और फिसलने जैसी घटनाओं के कारण भी गई है।
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सिर्फ 17 दिनों में 78 लोगों की जान जाना यह दिखाता है कि राज्य पर प्राकृतिक आपदाओं का कितना बड़ा संकट मंडरा रहा है। प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटा है, लेकिन मौसम की मार थमने का नाम नहीं ले रही। आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
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