मुकेश को जेल में टॉर्चर किया जा रहा, वह घटनास्थल पर था ही नहीं...दोषी को बचाने के लिए वकील की नई दलील

Published : Mar 17, 2020, 01:27 PM ISTUpdated : Mar 17, 2020, 01:28 PM IST
मुकेश को जेल में टॉर्चर किया जा रहा, वह घटनास्थल पर था ही नहीं...दोषी को बचाने के लिए वकील की नई दलील

सार

निर्भया के दोषी मौत से बचने के लिए हर कोशिश कर रहे हैं। ताजा मामला यह है कि दोषी मुकेश सिंह के वकील एमएल शर्मा ने दिल्ली की एक कोर्ट में अपील दायर की है। वकील ने कहा, मुकेश को 17 दिसंबर को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था। 

नई दिल्ली. निर्भया के दोषी मौत से बचने के लिए हर कोशिश कर रहे हैं। ताजा मामला यह है कि दोषी मुकेश सिंह के वकील एमएल शर्मा ने दिल्ली की एक कोर्ट में अपील दायर की है। वकील ने कहा, मुकेश को 17 दिसंबर को राजस्थान से गिरफ्तार किया गया था। अपराध के वक्त वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। इसके अलावा तिहाड़ जेल में मुकेश को टॉर्चर करने का आरोप लगाया गया है। 

20 मार्च को होनी है फांसी, जल्लाद को बुलाया गया
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने चौथी बार डेथ वॉरंट जारी किया, जिसके मुताबिक, 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे चारों दोषियों को फांसी दी जाएगी। फांसी देने के लिए यूपी के मेरठ से पवन जल्लाद को बुलाया गया है। पवन के आने के बाद फांसी से पहले डमी फांसी के जरिए टेस्टिंग की जाएगी।

तीन दोषियों ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में की अपील
निर्भया के तीन दोषी अक्षय, पवन और विनय ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में फांसी रोकने के लिए अपील की है। सोमवार को उनके वकील एपी सिंह ने कहा कि तीनों दोषियों को बचाने के लिए आखिरी वक्त से सभी कानूनी विकल्प अपनाते रहेंगे। 

20 मार्च को दोषियों को फांसी होगी या टल जाएगी?
दोषियों को फांसी देने के लिए चार बार डेथ वॉरंट जारी किया जा चुका है। तीन बार फांसी की तारीख रद्द कर दी गई। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस बार भी फांसी टल जाएगी? इसका जवाब खुद निर्भया की तरफ से केस लड़ रही वकील सीमा कुशवाहा ने दिया। उन्होंने कहा कि दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में दोषियों की सुनवाई ही नहीं होगी। 20 मार्च को चारों दोषियों को फांसी होगी।

चलती बस में निर्भया से गैंगरेप किया गया था
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।

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