
मुंबई. क्रूज ड्रग्स पार्टी (Drugs Party) केस मामले में महाराष्ट्र की राजनीति भी सुलगने लगी है। इस मामले को लेकर NCP लीडर और महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक लगातार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो(NCB) पर आरोप लगा रहे हैं। अब मलिक का कहना है कि NCB ने 11 लोगों को अरेस्ट किया था, लेकिन बाद में 3 लोगों को छोड़ दिया। उन्होंने NCB पर फेक बयान देने का आरोप भी लगाया। बता दें कि इस मामले में गिरफ्तार शाहरुख खान (Shahrukh Khan) के बेटे आर्यन खान (Aryan Khan) की जमानत याचिका शुक्रवार को खारिज हो गई थी। वे आर्थर रोड जेल में बंद हैं। इस मामले में NCB ने कहा-हमारी कार्रवाई नियमों के मुताबिक हुई है। आरोपियों के खिलाफ पक्के सबूत हैं। पकड़े गए 14 में 6 को छोड़ा गया और पूरी छानबीन के बाद गिरफ्तारी हुई थी।
तीन लोगों को किसके कहने पर छोड़ा गया?
नवाब मलिक ने फिर बयान देकर कहा-हमारी जानकारी है कि मुंबई पुलिस को सुबह तक जानकारी थी कि 11 लोगों को हिरासत में लिया गया। उसके बाद खबर आई कि 8 लोगों को ही हिरासत में लिया गया है। उसमें 3 लोगों को छोड़ा गया है। उनके नाम रिषभ सचदेवा, प्रतीक गाबा और आमिर फर्नीचरवाला हैं। NCB ने जिस दिन क्रूज़ पर छापेमारी की उस दिन NCB के जोनल निदेशक समीर वानखेड़े ने कहा था कि हमने 8-10 लोगों को हिरासत में लिया है। एक जवाबदेह अफसर इस तरह फेक स्टेटमेंट कैसे दे सकता है। हिरासत में लिए गए लोग 8 या 10 नहीं बल्कि 11 थे।
1300 में से 11 को सिलेक्ट करके पकड़ा गया
नवाब मलिक ने कहा-NCB से सवाल है कि आपने 1300 लोगों के जहाज पर रेड किया, 12 घंटे रेड चली, 11 लोगों को सिलेक्ट करके हिरासत में लिया। NCB को इसकी जानकारी देनी पड़ेगी कि इन 3 लोगों को छोड़ने का आदेश आपको किसने दिया। भाजपा के दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र के नेताओं ने इनको छोड़ने का आदेश दिया।
नवाब मलिक ने उठाए ये सवाल
रिषभ सचदेवा को हिरासत में लेने के 2 घंटे के बाद छोड़ा गया। तीनों लोगों को साथ में छोड़ा गया। जब सुनवाई चल रही थी, तब मजिस्ट्रेट कोर्ट में प्रतीक गाबा और आमिर फर्नीचरवाला का नाम रिफलेक्ट हुआ है। इन 2 लोगों के बुलाने पर ही आर्यन खान वहां गए थे।
कांग्रेस भी उठा रही सवाल
इसी केस को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि रेड के दौरान आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसकी पूरी जिम्मेदारी जांच अधिकारी और संबंधित एजेंसी की होती है। अगर कोई ऐसा नहीं करता है, तो उसे 10 साल या उससे भी ज्यादा की सजा का प्रावधान है। लेकिन NCB के अधिकारियों ने यहां लापरवाही दिखाते हुए 2 ऐसे लोगों को आरोपियों के पास रखा, जिनका NCB से से कोई संबंध नहीं था। वह आरोपियों से ऐसे पेश आ रहे थे, जैसे खुद अधिकारी हों। सचिन सावंत ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार से जांच की मांग की की है।
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