हिंदू परिवार में मौत पर कोई नहीं आया मदद करने, मुस्लिम युवाओं ने दिया अर्थी को कंधा

Published : Nov 18, 2025, 06:29 PM IST
हिंदू परिवार में मौत पर कोई नहीं आया मदद करने, मुस्लिम युवाओं ने दिया अर्थी को कंधा

सार

मालदा में TMC नेता द्वारा बहिष्कृत हिंदू परिवार में मौत पर कोई पड़ोसी मदद के लिए नहीं आया। पास के मुस्लिम युवकों ने शव को कंधा देकर अंतिम संस्कार कराया, जो सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल है।

सद्भावना की मिसालः पूरे भारत में नफरत की तस्वीर साफ दिख रही है। कई लोग मानते हैं कि हिंदू-मुस्लिम एकता या सांप्रदायिक सद्भाव अब दूर की कौड़ी है। लेकिन मालदा में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। टीएमसी नेता द्वारा बहिष्कृत किए गए एक परिवार के सदस्य की मौत पर कोई भी पड़ोसी साथ नहीं आया। पास के मोहल्ले के मुस्लिम समुदाय के नौजवानों ने शव को कंधे पर उठाकर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान पहुंचाया। मालदा की यह घटना हिंदू-मुस्लिम एकता की एक बड़ी मिसाल है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों के कंधों पर निकली हिंदू बुजुर्ग की अंतिम यात्रा

अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करने को लेकर विवाद चल रहा था, जिसमें स्थानीय टीएमसी नेता लंबे समय से कब्जा करने वालों का साथ दे रहे थे। टीएमसी नेता के कहने पर परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया था। आज परिवार के एक सदस्य की मौत के बाद भी कोई पड़ोसी शव को श्मशान ले जाने के लिए आगे नहीं आया। आखिरकार, पास के मुस्लिम समुदाय के लोगों के कंधों पर बुजुर्ग की अंतिम यात्रा निकली, जो इंसानियत और सद्भाव की मिसाल बनी। घटना सामने आते ही बीजेपी ने टीएमसी पर निशाना साधा।

टीएमसी नेता के डर से कोई नहीं आया आगे, मुस्लिम युवक बने मददगार

घर के सामने की सरकारी जमीन को लेकर कुछ स्थानीय लोगों से लंबे समय से विवाद चल रहा था, जिसमें टीएमसी नेता का समर्थन था। बार-बार पुलिस के पास जाने पर भी कोई हल नहीं निकला। इस विवाद के चलते टीएमसी नेता के कहने पर पड़ोसियों ने उस परिवार का बहिष्कार कर दिया था। अब परिवार के एक सदस्य की मौत के बाद भी कोई पड़ोसी आगे नहीं आया। अंतिम यात्रा के लिए लोग नहीं मिल रहे थे। आखिरकार, पास के मुस्लिम समाज के युवक आगे आए। उन्हीं के कंधों पर बुजुर्ग की अंतिम यात्रा निकली। इंसानियत और भाईचारे का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है।

टीएमसी और बीजेपी नेताओं में जुबानी जंग

इस बीच, घटना के सामने आते ही बीजेपी ने टीएमसी पर निशाना साधा है। टीएमसी ने सफाई दी है और जुबानी जंग शुरू हो गई है। यह घटना मालदा के हरिश्चंद्रपुर के कुशिदा ग्राम पंचायत के मुकुंदपुर गांव की है। उस गांव के रहने वाले टूपन दास और उनके परिवार का कुछ स्थानीय लोगों के साथ जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। आरोप है कि कुछ लोग उनके घर के सामने की सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे। जमीन पर कब्जा बनाए रखने के लिए वहां देवी सरस्वती की मूर्ति भी रख दी गई थी। इसे लेकर कई बार कहासुनी भी हुई। यह भी आरोप है कि कब्जा करने वालों को टीएमसी पंचायत समिति के सदस्य प्रकाश दास और पूर्व प्रधान रेजाउल हक का समर्थन मिल रहा था।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किए अंतिम संस्कार के सारे काम

परिवार ने कई बार हरिश्चंद्रपुर थाने, अनुमंडल प्रशासन और जिला प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई हल नहीं निकला। मृतक के बेटे किशोर दास, जो पेशे से एक सिविक वॉलंटियर हैं, ने भी इस घटना में पुलिस की भूमिका पर नाराजगी जताई है। उनका आरोप है कि नेता जिस तरफ इशारा करते हैं, पुलिस उसी तरफ काम करती है। यह भी आरोप है कि टीएमसी नेता प्रकाश दास के कहने पर ही इस विवाद के कारण पड़ोसियों ने उनका बहिष्कार कर दिया था। इस स्थिति में, विवाद की चिंता के कारण टूपन दास बीमार पड़ गए और आज उनकी मौत हो गई। लेकिन शव को श्मशान ले जाने के लिए कोई भी पड़ोसी आगे नहीं आया। परिवार बेबस हो गया था। यह जानकर पास के मुस्लिम समुदाय के लोग आगे आए। टूपन दास की अंतिम यात्रा उन्हीं के कंधों पर निकली। अंतिम संस्कार के सारे काम भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ही किए। यह घटना इंसानियत और भाईचारे की मिसाल बन गई है। लेकिन घटना सामने आने के बाद, बीजेपी का दावा है कि टीएमसी बहिष्कार की यह तालिबानी संस्कृति चला रही है। इसलिए, सभी हिंदुओं और मुसलमानों को मिलकर टीएमसी को उखाड़ फेंकना होगा। हालांकि, टीएमसी ने सभी आरोपों से इनकार किया है।

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