
Mysuru Murder Case: मैसूरू हत्या की यह कहानी पूरी फिल्मी है। पुलिस ने जिस हत्या के मामले में एक व्यक्ति को सजा करा दी, वह महिला अब तीन साल बाद जिंदा मिली है। हालांकि, मैसूर कोर्ट ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए पुलिस को तलब किया है।
दरअसल, यह मामला 2020 में शुरू हुआ जब कुशलनगर कस्बा के सुरेश अपनी पत्नी मल्लिगे की गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखाने थाने पहुंचे। पुलिस ने गुमशुदगी तो दर्ज कर ली लेकिन यह रिपोर्ट सुरेश के जीवन में तूफान ला दिया। कुशलनगर ग्रामीण थाने की पुलिस को इस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद बेट्टादारापुरा (Periyapatna taluk) में एक महिला का कंकाल मिला। पुलिस ने कंकाल मिलने के बाद यह दावा किया कि वह मल्लिगे का ही कंकाल है। हद तो तब हुई जब पुलिस ने मल्लिगे की हत्या के आरोप में उसके पति सुरेश को ही अरेस्ट कर लिया। पुलिस ने यह भी दावा कर दिया कि सुरेश ने उसे अवैध संबंधों के चलते मार डाला।
कर्नाटक पुलिस की लापरवाही यहीं खत्म नहीं हुई। मिले हुए कंकाल की डीएनए रिपोर्ट आए बिना ही केस में फाइनल चार्जशीट दाखिल कर दिया गया। इसके बाद सुरेश को अरेस्ट कर जेल भेज दिया गया। सुरेश करीब डेढ़ साल से सजा काट रहा है। जब डीएनए रिपोर्ट आई तो पुलिस के झूठे दावे की पोल खुली। लेकिन फिर भी सुरेश बाहर न निकल सका।
1 अप्रैल 2025 को सुरेश के एक दोस्त को मडिकेरी के एक होटल में मल्लिगे दिखी। सुरेश का दोस्त मल्लिगे हत्याकांड में गवाह भी था। उसने देखा वह एक अनजान व्यक्ति के साथ होटल में खाना खा रही है। उसने तत्काल इसकी सूचना संबंधित लोगों को दी। फिर कोर्ट के संज्ञान में भी मामला लाया गया। मल्लिगे को कोर्ट में पेश किया गया। मल्लिगे के कोर्ट में पेश होते ही पुलिस के होश उड़ गए।
मैसूर की पांचवीं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (Fifth Additional District and Sessions Court) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। कोर्ट ने Mysuru SP को 17 अप्रैल तक पूरा विवरण सौंपने का आदेश दिया है।
सुरेश के वकील पांडु पुजारी ने कहा कि बिना किसी पुष्टि के, पुलिस ने मेरे मुवक्किल को झूठे केस में फंसा दिया। DNA रिपोर्ट का इंतजार तक नहीं किया गया। अब मल्लिगे के जिंदा मिलने के बाद सब कुछ साफ हो गया है।
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