National Sports Bill क्या है, नेशनल स्पोर्ट्स कोड से है कितना अलग?

Published : Jul 23, 2025, 09:10 PM IST
Mansukh Mandaviya

सार

Monsoon Session: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 लोकसभा में पेश किया है। इसका उद्देश्य खेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है। जानें यह भारतीय राष्ट्रीय खेल विकास संहिता से कितना अलग है।

National Sports Bill 2025: भारत में खेल प्रशासन में सुधार के लिए केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025 (National Sports Governance Bill, 2025) लेकर आई। पास होने के बाद यह विधेयक मौजूदा भारतीय राष्ट्रीय खेल विकास संहिता (2011) का स्थान लेगा। इससे भारतीय खेल प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत निगरानी के नए युग की शुरुआत होगी।

2011 की खेल संहिता (Sports Code) ने भले ही सुशासन के लिए एक मार्गदर्शक ढांचे का काम किया, लेकिन इसमें महत्वपूर्ण सुधारों को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी समर्थन नहीं था। नए विधेयक का उद्देश्य संहिता से कई प्रमुख बदलावों के साथ इस कमी को पूरा करना है।

स्पोर्ट्स कोड और स्पोर्टस बिल में मुख्य अंतर

1- स्पोर्ट्स कोड खेल मंत्रालय द्वारा जारी कार्यकारी दिशानिर्देशों (executive guidelines) का एक समूह थी। वहीं, खेल विधेयक एक औपचारिक कानून है। पास होने के बाद यह कानूनी अधिकार प्राप्त कर लेगा। यह प्रशासनिक मानदंडों को वैधानिक तंत्रों के माध्यम से लागू करने योग्य बनाएगा।

2. खेल संहिता के तहत, पदाधिकारियों की आयु सीमा 70 वर्ष तय की गई थी। नया विधेयक नामांकन दाखिल करते समय 70 वर्ष से कम आयु वालों को अपना कार्यकाल पूरा करने की अनुमति देता है। अंतरराष्ट्रीय महासंघ के नियमों के अनुसार, इसमें पांच वर्ष की छूट भी शामिल है। खेल संहिता अध्यक्ष को तीन कार्यकाल तक सेवा करने की अनुमति देती है, जिसमें दो कार्यकाल के बाद अनिवार्य रूप से ब्रेक-ऑफ अवधि शामिल है। नया विधेयक अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष के लिए लगातार तीन कार्यकाल (अधिकतम 12 वर्ष) की अनुमति देता है। इसके बाद कार्यकारी समिति में फिर से चुनाव के लिए पात्र होने से पहले ब्रेक-ऑफ अवधि होती है।

3. 2011 की संहिता में लिंग या खिलाड़ी प्रतिनिधित्व के लिए कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं था। खेल विधेयक के अनुसार, राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSF) की कार्यकारी समिति में कम से कम चार महिलाओं और दो उत्कृष्ट योग्यता वाले खिलाड़ियों का होना अनिवार्य है। इससे निर्णय लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। खिलाड़ियों की आवाज सुनी जाएगी।

4. स्पोर्टस बिल पास होने के बाद तीन नए वैधानिक संस्थानों की स्थापना होगी। पहला है राष्ट्रीय खेल बोर्ड। यह राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज की देखरेख करेगा। दूसरा है राष्ट्रीय खेल न्यायाधिकरण। यह शासन और खिलाड़ियों से संबंधित विवादों का निपटारा करेगा। तीसरा है राष्ट्रीय खेल चुनाव पैनल। यह खेल निकायों में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराएगा।

नेशनल स्पोर्ट्स बिल संसद में पेश, आगे क्या होगा?

नेशनल स्पोर्ट्स बिल संसद में पेश किया गया है। बहस के बाद इसे पास कर दिया जाता है तो यह कानून बनेगा। राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2011 की संहिता का स्थान लेगा। भारत में खेल प्रशासन के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा स्थापित करेगा। इस विधेयक से भारतीय खेल प्रशासन में सुधार होगा। अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, चीन और जापान जैसे देशों में पहले से औपचारिक खेल कानून हैं।

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