
नई दिल्ली। श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए अचानक बड़े धमाके (Naugam Blast) ने पूरे जम्मू-कश्मीर को हिलाकर रख दिया। इस हादसे में 9 लोगों की मौत और 32 लोग घायल हुए। विस्फोट उस समय हुआ जब पुलिस बरामद किए गए विस्फोटकों की फोरेंसिक जांच कर रही थी। हादसे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फ़ारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah Statement) ने चिंता जताते हुए कहा कि इस घटना को देखते हुए कहीं फिर से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसा कोई कड़ा कदम न उठाया जाए। उन्होंने साफ कहा “ऑपरेशन सिंदूर से पहले भी कुछ नहीं निकला, सिर्फ नुकसान हुआ।” अब्दुल्ला के इस बयान ने राजनीतिक हलचल और बढ़ा दी है और सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर वे किस डर की ओर इशारा कर रहे हैं?
श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए इस भयानक हादसे को गृह मंत्रालय ने "एक बड़ा आकस्मिक विस्फोट" बताया है। विस्फोट तब हुआ जब पुलिस आतंकी मॉड्यूल से बरामद किए गए विस्फोटकों की फोरेंसिक जांच कर रही थी। अचानक से हुए इस धमाके ने ना सिर्फ पुलिस बल के जवानों की जान ली, बल्कि आसपास के घरों को भी भारी नुकसान पहुंचाया। इसी बीच फ़ारूक अब्दुल्ला ने "ऑपरेशन सिंदूर" का जिक्र करते हुए चिंता जताई कि कहीं फिर से कोई ऐसा कदम न उठाया जाए, जिससे हालात और बिगड़ें।
फ़ारूक अब्दुल्ला ने कहा कि “इससे कुछ नहीं निकला। लोग मरे, सीमाएं अस्थिर हुईं और तनाव बढ़ा। उम्मीद है कि फिर ऐसा कुछ नहीं होगा।” उनका इशारा साफ था कि नौगाम जैसा विस्फोट कई बार सरकारों को अचानक बड़े सैन्य या सुरक्षा कदम उठाने की ओर ले जाता है, जिनका असर आम जनता पर पड़ता है। अब्दुल्ला ने अटल बिहारी वाजपेयी का भी हवाला दिया और कहा कि "दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं। भारत और पाकिस्तान को अपने रिश्ते सुधारने होंगे।” उन्होंने संकेत दिया कि तनाव से ज्यादा समाधान बातचीत से निकलता है।
गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रशांत लोखंडे ने बताया कि पुलिस आतंकी मॉड्यूल से बरामद विस्फोटकों की रासायनिक और फोरेंसिक जांच कर रही थी। विस्फोटकों को एक खुले और सुरक्षित घोषित क्षेत्र में रखा गया था। जांच के दौरान अचानक बड़ा विस्फोट हो गया। इस हादसे में घटनास्थल पर मौजूद कई पुलिस अधिकारी और अन्य लोग मारे गए। आसपास की इमारतों के शीशे टूट गए और पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
फ़ारूक अब्दुल्ला का बयान इसी बिंदु पर सबसे ज्यादा सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि विस्फोटकों को संभालने का काम उन विशेषज्ञों को दिया जाना चाहिए था जो इससे निपटने में प्रशिक्षित होते हैं। उनके शब्दों में कहें तो "जो लोग विस्फोटक बेहतर समझते हैं, उनसे पहले सलाह लेनी चाहिए थी।" इससे साफ है कि वे इस घटना को सुरक्षा प्रबंधन की चूक मान रहे हैं।
पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि विस्फोट कैसे और किस तकनीकी कमी के कारण हुआ। केंद्र सरकार भी विस्तृत रिपोर्ट मांग चुकी है। वहीं, आम लोगों और स्थानीय नेताओं में डर की भावना बनी हुई है कि कहीं यह घटना किसी बड़े तनाव का कारण न बन जाए।
नौगाम का यह बड़ा विस्फोट सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा, राजनीति और कूटनीति, तीनों स्तरों पर बहुत सारे सवाल खड़ा कर रहा है। फ़ारूक अब्दुल्ला का बयान इस घटना को और भी गंभीर बना देता है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर अतीत की उन कार्रवाइयों की याद दिलाई, जिनके नतीजे अच्छे नहीं रहे थे। आगे जांच क्या बताएगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन नौगाम विस्फोट ने घाटी की हवा में फिर से तनाव बढ़ा दिया है।
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