
Delhi Blast Case: लाल किला ब्लास्ट केस में दिल्ली की एक कोर्ट ने गुरुवार 20 नवंबर को 4 आरोपियों को 10 दिन के लिए NIA की कस्टडी में भेज दिया। इनके नाम पुलवामा के डॉ. मुजम्मिल शकील गनी, सहारनपुर से गिरफ्तार प्रैक्टिशनर डॉ. अदील अहमद राठेर, लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद उर्फ मैडम सर्जन और शोपियां का मुफ्ती इरफान अहमद है। पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा जारी प्रोडक्शन वारंट पर चारों को श्रीनगर में कस्टडी में लिया गया। सेंट्रल काउंटर-टेरर एजेंसी के मुताबिक सईद, राठेर और दो अन्य का 10 नवंबर को दिल्ली ब्लास्ट की प्लानिंग करने और उसे अंजाम देने में बड़ा हाथ था। इस हमले में 10 लोगों की मौत हुई, जबकि 32 घायल हुए थे।
जांच एजेंसियों का कहना है कि चारों संदिग्ध आतंकी साजिश के लॉजिस्टिक्स, प्लानिंग और ग्राउंड हेल्प में शामिल थे। अब तक चारों जम्मू-कश्मीर पुलिस की कस्टडी में थे। ये गिरफ्तारियां NIA द्वारा पहले की गई दो गिरफ्तारियों के बाद हुई है। इससे पहले अमीर राशिद अली, जिसके नाम पर धमाके में इस्तेमाल की गई i20 कार रजिस्टर्ड थी और जसीर बिलाल वानी उर्फ दानिश, जिसने आतंकी मॉड्यूल को जरूरी टेक्निकल सपोर्ट दिया था। दोनों से अभी पूछताछ चल रही है।
बता दें कि जांच एजेंसियों ने दिल्ली ब्लास्ट केस में अब तक 73 गवाहों से पूछताछ की है, जिसमें घायल बचे लोग भी शामिल हैं। एजेंसी हमले के पीछे की बड़ी साजिश का पता लगाने और नेटवर्क को खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस, जम्मू और कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। जांच अब सऊदी अरब, मालदीव और तुर्की के साथ-साथ भारत के कई राज्यों तक फैल चुकी है।
लखनऊ से गिरफ्तार आतंकी डॉक्टर शाहीन सईद ने कानपुर और उसके आसपास के जिलों की 19 महिलाओं को चरमपंथी बनाया है। यूपी एटीएस, जांच एजेंसियों और जिला पुलिस को इन सभी महिलाओं की तलाश है। बताया जा रहा है कि ये सभी महिलाएं भारत में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) की महिला विंग प्रमुख डॉ. शाहीन सईद के संपर्क में थीं। अधिकारियों को संदेह है कि ये महिलाएं कट्टरपंथी हैं और उसके भाषणों ने इनका ब्रेनवॉश कर दिया है।
लखनऊ की रहने वाली डॉ. शहीन सईद का इतिहास काफी रहस्यमय है। 2010 के बाद से उसकी सोच और विचारधारा में अचानक बदलाव आया। 2013 में अचानक छुट्टी लेकर वह गायब हो गई। 4 जनवरी 2014 को लौटने की बात की लेकिन कभी वापस नहीं आई। 2016 में जब यूनिवर्सिटी स्टाफ उसके पते पर पहुंचा तो एड्रेस भी फर्जी निकला। अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कई फैकल्टी मेंबर का कहना है कि उसका व्यवहार बेहद अजीब था। वो कोई डिसिप्लिन फॉलो नहीं करती थी। यहां तक कि यूनिवर्सिटी में उससे मिलने बाहर के कई लोग भी आते रहते थे।
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