
नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों की फांसी पर सस्पेंस बना है। इस बीच निर्भया को लेकर सीएमओ द्वारा विवादित बयान देने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। निर्भया के दादा ने सीएमओ के निलंबन की मांग की है। उन्होंने कहा कि जब तक सीएमओ का निलंबन नहीं होगा, तब तक वह धरने से नहीं उठेंगे। इनती ही नहीं, उन्होंने कहा कि जल्द से जल्द निलंबन नहीं हुआ तो वे खुद को आग लगा लेंगे। सीएमओ पीके मिश्रा द्वारा निर्भया पर दिए गए विवादित बयान को लेकर डीएम ने जांच का आदेश दे दिया है।
सीएमओ ने क्या बयान दिया था?
यूपी के बलिया में निर्भया का गांव है। वहां पर सपा सरकार ने एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण करवाया था। लेकिन यहां पर डॉक्टर न होने से लोगों को दिक्कत होती है। स्थानीय लोगों ने तीन दिन तक धरना दिया। इस दौरान सीएमओ ने कहा था,आप लोग मेरी बात सुनिए। यहां 17 साल डॉक्टरी पढ़ाने की ताकत है? अगर डॉक्टर बनाने की क्षमता नहीं है तो डॉक्टर कहां से आएंगे।
- डॉक्टर की बात सुनकर स्थानीय लोगों ने कहा कि डॉक्टर बनाने के लिए ही दिल्ली भेजा था। निर्भया का नाम आपने नहीं सुना? इस पर सीएमओ ने जवाब दिया कि दिल्ली भेजोगे तो यही होगा।
चारों दोषियों को कब फांसी होगी?
चारों दोषियों में सिर्फ पवन गुप्ता के पास दया याचिका का विकल्प बचा हुआ है। बाकी तीन दोषियों को पास से दया याचिका का विकल्प खत्म हो चुका है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही चारों को फांसी पर चढ़ाया जाएगा।
क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड?
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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