
नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया से गैंगरेप हुआ। उसे सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। 3 दिन बाद उसे होश आया तो उसने मेरी तरफ देखा और बोली, मां आज तू नहाई नहीं क्या? तेरी बिंदी कहां है? जाओ और बिंदी लगाकर आओ। मां ने रोते हुए बेटी के दर्द की कहानी बयां की। उन्होंने बताया कि हादसे से कुछ दिनों पहले ही उसने मेरे लिए चूड़ी और नेल पॉलिश लेकर आई थी। आज भी वो चूड़ी और नेल पॉलिश ऐसे ही रखे हैं।
भूलाए नहीं भूलते बेटी के दर्द के वो 13 दिन
निर्भया की मां ने एक इंटरव्यू में बताया था कि निर्भया से गैंगरेप के बाद उसके साथ 13 दिन में जो दर्द हुआ, उसे मैंने सिर्फ देखा, लेकिन मेरी बेटी ने जो सजा, उसे मैं भुलाए नहीं भूल सकती हूं।
'जिस लड़की पर कभी हाथ नहीं उठाया, उसे ऐसी तकलीफ से गुजरना पड़ा'
निर्भया की मां ने बताया था कि जिस लड़की पर हमने कभी हाथ नहीं उठाया, उसे ऐसे दर्द से गुजरना पड़ा। इतना कहते ही निर्भया की मां की आंखों से आंसू टपकने लगते हैं। मां ने बताया था कि दर्द की वजह से मेरी बेटी सो नहीं पाती थी। दर्द को कंट्रोल करते हुए कहती थी, मम्मी पापा, मैं ठीक हो जाऊंगी। आप दोनों परेशान न हो। लेकिन उसे ऐसा सदमा और दर्द था कि वह सो नहीं पाती थी।
'बेटी आंख बंद करते ही डरती'
मां ने बताया कि बेटी इतना ज्यादा डरी थी कि कहती थी कि मां आंख बंद करते ही लगता है कि कोई आसपास खड़ा है। डर से आंख ही बंद नहीं करती थी। उसके पास दो नर्स हमेशा उसके पास रहते थे। मां ने बताया था कि मौत से पहले निर्भया उंगलियों पर दिन गिना करती थी। वह मुझसे बोलती थी, मां आज कौन सा दिन है। बहुत दिन हो गए हैं। मुझे घर जाना है। जब नर्स कहती कि अभी तबीयत ठीक नहीं है, तब वह मायूस हो जाती थी।
'उसने मेरा हाथ पकड़ा और गले लगा लिया'
जिस दिन निर्भया का निधन हुआ, उस दिन शायद उसे पता चल गया था। उसने अपने पापा को बुलाया और बोली, आई एम सॉरी पापा। मैंने आप दोनों को बहुत तकलीफ दी है। फिर मेरा हाथ पकड़ा और अपने गले लगा लिया। उस वक्त हम सिंगापुर के अस्पताल में थे।
'..जब वापस आकर देखा तो उसने आंखें बंद कर लीं'
निधन वाले दिन बेटी ने हम दोनों से कहा कि आप लोग जल्दी से जाकर खाना खा कर आओ। थोड़ी देर में किसी ने पुकारा और कहा कि आपकी बेटी बुला रही है। वहां गए तो देखा उसकी आंखों बंद हो रही थीं। वह हमें देख नहीं पाई। फिर उसने कभी आंखें नहीं खोलीं।
1 फरवरी को सुबह 6 बजे दोषियों को फांसी
निर्भया के दोषियों को 1 फरवरी की सुबह 6 बजे फांसी पर लटका दिया जाएगा। हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि फांसी की तारीख टल सकती है, क्योंकि अभी सिर्फ एक दोषी की दया याचिका खारिज हुई है। ऐसे में तीन दोषी अभी दया याचिका लगा सकते हैं। ऐसे में फांसी की तारीख बढ़ाई जा सकती है। नियम के मुताबिक अगर दया याचिका खारिज होती है, उसके बाद भी दोषी को 14 दिन का वक्त दिया जाता है।
क्या है निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड?
दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। छात्रा के दोस्त को भी बेरहमी से पीटा गया। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।
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