अब एक और मंदिर का मामला पहुंचा कोर्ट, कहा गया पहले चबुतरे पर रखी थीं तस्वीरें

Published : Nov 27, 2019, 11:13 AM ISTUpdated : Nov 27, 2019, 12:22 PM IST
अब एक और मंदिर का मामला पहुंचा कोर्ट, कहा गया पहले चबुतरे पर रखी थीं तस्वीरें

सार

आईआईटी गुवाहाटी कैंपस में एक मंदिर को लेकर इंस्टिट्यूट प्रशासन और वहां के एक शिक्षक में टकराव की स्थिति निर्मित हो गई है। असिस्टेंट प्रोफेसर बृजेश राय ने यह आरोप लगाया है कि मंदिर का ढांचा चार साल पहले इंस्टिट्यूट की इजाजत के बिना बना दिया गया था।

गुवाहाटी. आईआईटी गुवाहाटी कैंपस में एक मंदिर को लेकर इंस्टिट्यूट प्रशासन और वहां के एक शिक्षक में टकराव की स्थिति निर्मित हो गई है। जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर बृजेश राय ने यह आरोप लगाया है कि मंदिर का ढांचा चार साल पहले इंस्टिट्यूट की इजाजत के बिना बना दिया गया था। वहीं, आईआईटी गुवाहाटी प्रशासन का दावा है कि वहां मंदिर 'अनंत काल' से है। दोनों के बीच हुए टकराव के बाद यह मामला कोर्ट की शरण में पहुंच गया। जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर राय ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है।

चबुतरे की तरह था मंदिर

असिस्टेंट प्रोफेसर बृजेश राय ने दावा किया है कि 2015 तक वह 'मंदिर' पीपल के एक पेड़ के पास 'चबूतरे' की तरह था और कैंपस में काम करने वाले मजदूरों ने वहां कुछ देवी-देवताओं की तस्वीरें रखी थीं। राय का कहना है कि 2015 के बाद इसे परमानेंट स्ट्रक्चर का रूप दिया जाने लगा। राइट टु इन्फॉर्मेशन एक्ट के तहत दाखिल एक आवेदन के जवाब में इंस्टिट्यूट ने राय को बताया कि प्रशासन ने कैंपस में शिव मंदिर निर्माण में कोई मदद नहीं की थी। एक सवाल पर इंस्टिट्यूट ने बताया था कि वहां मंदिर 'IIT गुवाहाटी बनने के पहले से था।' वहीं एक अन्य जवाब में उनसे कहा कि यह तो 'अनंत काल' से वहीं है।

छात्रों ने निकाला था कैंडल मार्च 

राय को टर्मिनेट किए जा सकने की खबरें सामने आईं तो 17 नवंबर को कैंपस में सैकड़ों छात्रों ने राय के सपोर्ट में कैंडल लाइट मार्च निकाला। जिसके बाद इंस्टीट्यूट ने छात्रों को ईमेल भेजकर यह बताने को कहा था कि वे कैंडल मार्च में शामिल थे या नहीं और अगर थे तो उसकी वजह क्या थी।

सस्पेंड किए जा चुके हैं राय 

हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर राय ने कहा, 'मैं मंदिरों का विरोधी नहीं हूं, लेकिन पूजापाठ के लिए पर्सनल स्पेस होना चाहिए।' राय ने कहा कि शैक्षिक संस्थान में किसी धर्म से जुड़ा स्ट्रक्चर कैसे बनाया जा सकता है? गौरतलब है कि इस विवाद से पहले राय विवादों में आ चुके है। जिसमें दिसंबर 2017 में सस्पेंड कर दिया गया था। उन पर एक अन्य प्रोफेसर से हाथापाई करने का आरोप था। उन्होंने इस आरोप को झूठा बताया। नवंबर 2018 में उन्हें तब बहाल करना पड़ा, जब गुवाहाटी हाई कोर्ट ने सस्पेंशन को अवैध करार दिया। 

सात वर्षों में बदली तस्वीर 

गूगल मैप्स और राय की ओर से ईटी को दी गई तस्वीरों में दिख रहा है कि पिछले सात वर्षों में मंदिर के अस्थायी ढांचे को कंक्रीट बिल्डिंग में बदल दिया गया और दरवाजे-खिड़कियां लगा दी गईं। राय ने कहा कि यह मामला और कैंपस के कई अन्य मसले उठाने पर उन्हें इंस्टिट्यूट की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। राय ने बताया कि उन्होंने स्टाफ की हायरिंग में उचित प्रकिया नहीं अपनाए जाने के मामले में एक और जनहित याचिका दाखिल की है।
 

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