
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के गंदेरबल जिले में नागरिकों पर हुए हमले को 'आतंकी हमला' कहने से सीएम उमर अब्दुल्ला कतरा रहे हैं। इसके लिए उनकी काफी आलोचना हो रही है। श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरंग निर्माण में लगे अलग-अलग राज्यों के मजदूरों पर हुए इस हमले की निंदा करते हुए एक्स पर पोस्ट लिखने वाले उमर ने हमलावरों को आतंकी कहने से परहेज किया। सोशल मीडिया पर लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं, 'जम्मू-कश्मीर में नेकां और आतंकवाद वापस आ गया है। आपका परिवार आतंकियों का समर्थक है, ये तो पता ही है। लेकिन कम से कम सार्वजनिक मंचों पर तो उन्हें आतंकी कहिए।' वहीं, पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने भी इसे आतंकी हमला नहीं कहा।
जम्मू-कश्मीर के गंदेरबल जिले में रविवार को प्रवासी मजदूरों के कैंप पर हमला करने वाले आतंकियों के पास भारी हथियार थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने बताया कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को मारने के इरादे से ही आतंकियों ने मजदूरों के कैंप पर हमला किया। घटनास्थल का दौरा कर चुकी एनआईए की टीम जांच कर रही है। पुलिस ने बताया कि रविवार को दो हथियारबंद आतंकियों ने कैंप पर हमला किया।
इस घटना पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'जब तक पाकिस्तान सरकार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करती, तब तक भारत के साथ शांति वार्ता संभव नहीं है।' दूसरी ओर, राहुल गांधी ने कहा, 'गंदेरबल आतंकी हमले में 7 लोगों की हत्या कायरतापूर्ण और अक्षम्य अपराध है।' कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, 'यह एक अमानवीय और घृणित कृत्य है। एक राष्ट्र के रूप में, हम आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एकजुट हैं।'
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