दिल्ली हिंसा को लेकर संसद में दूसरे दिन भी गतिरोध, विपक्ष ने कहा, 'पूरी दुनिया बोल रही और सदन चुप'

Published : Mar 03, 2020, 07:59 PM IST
दिल्ली हिंसा को लेकर संसद में दूसरे दिन भी गतिरोध, विपक्ष ने कहा, 'पूरी दुनिया बोल रही और सदन चुप'

सार

लोकसभा में हंगामे के दौरान कुछ समय के लिए सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के कुछ सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी देखी गयी। हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर होली के बाद चर्चा कराने को तैयार है। 

नई दिल्ली. संसद में दिल्ली हिंसा के विषय पर चर्चा कराए जाने की विपक्ष की मांग को लेकर मंगलवार को दूसरे दिन भी गतिरोध कायम रहा तथा विपक्ष ने दावा किया कि इस विषय पर पूरी दुनिया बोल रही है लेकिन सदन को बोलने नहीं दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा को दो-दो बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।

दिल्ली हिंसा पर होली बाद लोकसभा में चर्चा

लोकसभा में हंगामे के दौरान कुछ समय के लिए सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के कुछ सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी देखी गयी। हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर होली के बाद चर्चा कराने को तैयार है। राज्यसभा में भाजपा के भूपेन्द्र यादव ने कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा कराने का निर्णय सभापति पर छोड़ दिया जाना चाहिए।

हिंसा पर दोनों सदनों में भारी हंगामा

दोनों सदनों में इस मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के चलते प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो पाया। इस मुद्दे पर दोनों सदनों में सोमवार को भी गतिरोध रहा था। लोकसभा में हंगामे के बीच ही सरकार ने बैंककारी विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 को पारित कराने का प्रयास किया। इससे विपक्षी सदस्यों का विरोध और तेज हो गया। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने दिल्ली हिंसा के मुद्दे पर उच्च सदन में चर्चा कराने की विपक्षी दलों की मांग को तर्कसंगत बताते हुए कहा, ‘‘एक घटना हुई, जिसकी हम सभी लोग निंदा करते हैं। इस घटना की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है और हमारे यहां संसद शुरू हो गयी है लेकिन इस विषय पर चर्चा न हो, यह बड़ा ही अटपटा लगेगा। पूरी दुनिया देखती है कि सब बोल रहे हैं और भारत का सदन नहीं बोल रहा है।’’

BJP ने कहा सदन में चर्चा कराने से कानून व्यवस्था बिगड़ेगी

उन्होंने सत्तापक्ष की इस आशंका को भी बेबुनियाद बताया कि सदन में चर्चा कराने से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ेगी। उन्होंने कहा, ‘‘सदन के सभी सदस्य अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं और मैं नहीं समझता हूं कि यहां ऐसा कोई भी गैरजिम्मेदार सदस्य होगा जो तेल डालकर जायेगा। यहां सभी जिम्मेदार सदस्य हैं और वे हालात पर पानी और मिट्टी डालकर ही जायेंगे।’’ आजाद ने कहा कि सभी सदस्य ऐसी बात कहना चाहेंगे जिससे हालात सामान्य हों, अफवाहों पर यकीन नहीं करने की अपील करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘अगर इस पर भी सत्तापक्ष को कोई शंका होती है तो मैं नहीं समझता हूं कि विपक्ष का ऐसा कोई गैरजिम्मेदार व्यक्ति है जो इस स्थिति में भी आग डालने की कोशिश करेगा।’’

राज्यसभा में गहलोत ने कहा सरकार चर्चा के लिए तैयार

राज्यसभा में नेता सदन थावरचंद गहलोत ने कहा कि सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है। सभापति द्वारा जब भी चर्चा का समय नियत किया जाए, उस समय सरकार चर्चा के लिये तैयार है। उपसभापति हरिवंश ने कहा कि अगर सत्तापक्ष और विपक्ष चर्चा के मुद्दे पर एकमत हैं तो दोनों पक्षों को सभापति से मिलकर चर्चा का समय तय करना चाहिये। भाजपा के भूपेन्द्र यादव ने इस मुद्दे पर चर्चा कराने का निर्णय सभापति पर छोड़ने का सुझाव दिया। कांग्रेस के आनंद शर्मा और टीआरएस के के केशव राव ने कहा कि इस मुद्दे पर निर्णय होने तक, सदन की बैठक को बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे तक स्थगित कर दिया जाये।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा देशहित को ध्यान में रखते हुए 11 मार्च को होगी चर्चा

लोकसभा में इस मुद्दे पर चर्चा कराये जाने के मामले में अपनी व्यवस्था देते हुए अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, ‘‘देशहित को ध्यान में रखते हुए मैं व्यवस्था देता हूं कि होली के बाद 11 मार्च को इस विषय पर चर्चा होनी चाहिए। होली सौहार्दपूर्ण तरीके से मननी चाहिए। सरकार इस विषय पर चर्चा को तैयार है।’’

(ये खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई/भाषा की है। एशियानेट हिन्दी न्यूज ने सिर्फ हेडिंग में बदलाव किया है।)

(फाइल फोटो)
 

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