
International Sex Workers Day 2022: हर साल 2 जून को इंटरनेशनल सेक्स वर्कर्स डे मनाया जाता है। दरअसल, 70 के दशक में फ्रांस की पुलिस ने यौनकर्मियों को चोरी-छुपे काम करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद 2 जून, 1975 को करीब 100 यौनकर्मियों ने अमानवीय तरीके से कराए जा रहे इस काम को लेकर फ्रांस के ल्योन में सेंट निजियर चर्च पर कब्जा कर लिया और हड़ताल पर बैठ गए। बाद में इस मुहिम ने बड़ा रूप ले लिया और इसके बाद 1976 से इस दिन को इंटरनेशनल सेक्स वर्कर डे के रूप में मनाया जाने लगा। इंटरनेशनल सेक्स वर्कर्स डे पर हम बता रहे हैं बांग्लादेश के एक वेश्यालम में बेची गई ऐसी ही सेक्स वर्कर की दर्दभरी दास्तां।
14 की उम्र में वेश्यालय में बेच दिया :
बांग्लादेश के कांदीपारा स्थित एक वेश्यालय में पिछले 9 साल से रह रही एक लड़की ने कुछ साल पहले खुद पर हुए अत्याचारों की दर्दनाक दास्तां बताई थी। उसके मुताबिक, उसे सिर्फ 14 साल की उम्र में एक वेश्यालय में बेच दिया गया था। जब उसने ये काम करने से मना किया तो उसके साथ मारपीट की गई।
समय से पहले जवान बनाने के लिए दी गई दवाएं :
पीड़िता के मुताबिक, चूंकि मेरी उम्र कम थी इसलिए मुझे समय से पहले जवान बनाने और शारीरिक विकास के लिए तरह-तरह की दवाएं खिलाई जाती थीं। ये दवाएं ज्यादातर दुधारू पशुओं को मोटा बनाने के लिए दी जाती हैं। अब मुझे रोजाना करीब 10 से 12 कस्टमर को सर्विस देनी पड़ती है। हर एक ग्राहक को सर्विस देने के बदले मुझे 150 रुपए मिलते हैं।
11 साल की उम्र में जबरन करा दी मेरी शादी :
पीड़िता ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा था कि जब मेरी खेलने-पढ़ने की उम्र थी, तभी मेरे घरवालों ने जबरन मेरी शादी करा दी। मेरा पति मुझसे उम्र में तीन गुना बड़ा था। कुछ ही सालों में मैंने एक बेटी को जन्म दिया। इसी बीच एक सड़क हादसे में मेरे पति की मौत हो गई। पति की मौत के बाद तो मेरे ससुरालवालों ने मुझे घर से निकाल दिया।
एक शख्स ने पैसों की लालच में मुझे बेचा :
इसके बाद मैं अपनी बेटी के साथ मायके चली आई, लेकिन मेरे घर की माली हालत अच्छी नहीं थी। फिर मैं काम की तलाश में ढाका चली गई। वहां मैंने कई दिनों तक दर-दर की ठोकरें खाईं। इसी बीच, एक सेक्स वर्कर की नजर मुझ पर पड़ी तो उसने मुझे पैसों का लालच दिया और बाद में वेश्यालय में लाकर बेच दिया।
18 साल की होने पर मुझे लाइसेंस बनवाने भेजा :
कांदीपारा वेश्यालय में तीन दिन तक मुझे एक कमरे में बंद रखा गया। मैंने जब यहां से भागने की कोशिश की तो मेरे साथ मारपीट की गई। तब मैं सिर्फ 14 साल की थी और मेरा शारीरिक विकास उतना नहीं हुआ था। ऐसे में मुझे समय से पहले जवान और मोटा बनाने के लिए ऑराडेक्सन दवा दी जाती थी। जब मैं 18 साल की हो गई तो मुझे लाइसेंस बनवाने के लिए थाने भेजा। डर के मारे मैंने पुलिस को वही बातें बताई, जो मुझे सिखाई गई थीं। मैंने कहा- मैं वेश्यालय में काम करने के लिए तैयार हूं, मेरे पास इसके अलावा कोई चारा नहीं था।
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