Parkash Singh Badal Passed Away: सरपंच के रूप में शुरू किया था राजनीतिक करियर, 5 बार बने पंजाब के CM

Published : Apr 25, 2023, 11:25 PM ISTUpdated : Apr 25, 2023, 11:26 PM IST
Prakash Singh Badal Photo

सार

95 साल की उम्र में प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal Passed Away) का मंगलवार की रात निधन हो गया। वह पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे। उन्होंने सरपंच के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था।

नई दिल्ली। पंजाब के सबसे कद्दावर नेताओं में से एक प्रकाश सिंह बादल (Parkash Singh Badal Passed Away) नहीं रहे। 95 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उन्होंने सरपंच के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी।

भारत की आजादी के साल ही उन्होंने बादल गांव के सरपंच (ग्राम प्रधान) का चुनाव जीता था। सरपंच के रूप में राजनीतिक करियर शुरू करने वाले प्रकाश सिंह बादल 1970 में पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद चार बार और सीएम पद के लिए शपथ लिया। 1970 में जब उन्होंने पहली बार सीएम पद संभाला था तब वह राज्य के सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री थे।

8 दिसंबर 1927 को हुआ था प्रकाश सिंह बादल का जन्म
प्रकाश सिंह बादल का जन्म 8 दिसंबर 1927 को हुआ था। वह शिरोमणि अकाली दल (SAD) के संरक्षक थे। 1995 से 2008 तक प्रकाश सिंह बादल अपनी पार्टी के अध्यक्ष थे। बाद में उन्होंने अपनी जगह बेटे सुखबीर सिंह बादल को दी।

1957 में पहली बार विधायक बने थे प्रकाश सिंह बादल
प्रकाश सिंह बादल ने शिरोमणि अकाली दल ज्वाइन किया था। उन्होंने SAD के टिकट से 1957 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसके बाद 1969 में फिर से विधायक चुने गए। 10 बार विधायक चुने गए बादल 1972, 1980 और 2002 में पंजाब में विपक्ष के नेता बने थे।

सबसे कम उम्र के मुख्यमंत्री थे प्रकाश सिंह बादल
प्रकाश सिंह बादल पहली बार 1970 में सीएम बने। वह तब भारत के किसी भी राज्य के सबसे कम उम्र के सीएम थे। 1971 तक वह सीएम की कुर्सी पर रहे। दूसरी बार बादल 1977-1980 तक मुख्यमंत्री रहे। तीसरी बार वह 1997-2002 तक सीएम रहे। 2007-2017 तक वह दो बार सीएम बने थे।

यह भी पढ़ें- पंजाब के पूर्व CM प्रकाश सिंह बादल का 95 साल की उम्र में निधन, PM Modi ने जताया शोक, बादल गांव में होगा अंतिम संस्कार

2015 में प्रकाश सिंह बादल को मिला था पद्म विभूषण सम्मान
प्रकाश सिंह बादल को 2015 में पद्म विभूषण सम्मान मिला था। यह भारत का दूसरे सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए 3 दिसंबर 2020 को पुरस्कार लौटा दिया था।

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