अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस: संसद जनता के विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति- ओम बिरला

Published : Jun 30, 2026, 09:30 AM IST
Lok Sabha Speaker Om Birla (Photo/ANI)

सार

अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसद जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों और विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और जवाबदेह शासन सुनिश्चित करने में संसदीय संस्थानों के महत्व पर जोर दिया।

नई दिल्ली [भारत], 30 जून (एएनआई): लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संसद जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों और विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है और यह लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

एक्स पर एक पोस्ट में, बिरला ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने और जवाबदेह शासन सुनिश्चित करने में संसदीय संस्थानों के महत्व पर प्रकाश डाला। बिरला ने कहा, "सभी जनप्रतिनिधियों और दुनिया की लोकतांत्रिक संस्थाओं को अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। संसद, जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों और विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है, जहां विचारों का मंथन होता है, नीतियों का निर्माण होता है और राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय होती है। एक मजबूत, स्वतंत्र और जवाबदेह संसद ही लोकतंत्र की असली ताकत और नागरिकों के अधिकारों की सबसे बड़ी संरक्षक होती है।"

भारत की संसद पर क्या बोले बिरला?

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की संसद के रूप में, इसने हमेशा संविधान की भावना, लोकतांत्रिक परंपराओं और लोगों के प्रतिनिधित्व की विरासत को बनाए रखा है। उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस की सभी जनप्रतिनिधियों एवं विश्व की लोकतांत्रिक संस्थाओं को हार्दिक शुभकामनाएँ। संसद, जनता की आकांक्षाओं, अधिकारों और विश्वास की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है, जहाँ विचारों का मंथन होता है, नीतियों का निर्माण होता है और राष्ट्र के भविष्य की दिशा तय होती है।"

बिरला ने कहा, "दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र, भारत की संसद के रूप में, इसने हमेशा संविधान की भावना, लोकतांत्रिक परंपराओं और लोगों के प्रतिनिधित्व की गौरवशाली विरासत को शक्तिशाली रूप से बरकरार रखा है। विविधता से भरे हमारे देश में, संसद राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों का एक मंच है, जहां हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर नागरिक की आवाज को जगह मिलती है।"

कानून बनाने से भी बढ़कर है संसद की भूमिका

बिरला ने इस बात पर जोर दिया कि संसद की भूमिका कानून बनाने से भी आगे तक फैली हुई है। उन्होंने कहा, "आज के युग में, संसद की भूमिका केवल विधायी कार्यों तक ही सीमित नहीं है; यह सरकारी जवाबदेही सुनिश्चित करने, सार्वजनिक हित के मुद्दों पर सार्थक विचार-विमर्श को प्रोत्साहित करने, लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा को बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन स्थापित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभाती है।"

इस अवसर को आत्मनिरीक्षण का मौका बताते हुए उन्होंने कहा, "अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस हमें लोकतंत्र की आत्मा - संवाद, सहमति, जिम्मेदारी, पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादा को और मजबूत करने का संकल्प लेने का अवसर प्रदान करता है।"

क्या है अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस?

अंतर्राष्ट्रीय संसदीय दिवस, जिसे विश्व संसद दिवस के रूप में भी जाना जाता है, हर साल 30 जून को विश्व स्तर पर मनाया जाता है। 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा स्थापित और अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) द्वारा संचालित यह दिन 1889 में आईपीयू की स्थापना की सालगिरह का प्रतीक है। (एएनआई)

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