Gwalior Job Fraud में देवेंद्र कुमार दुबे पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और ₹2.8 लाख की सैलरी वाला बैंक स्टेटमेंट देकर CEO पद तक पहुंचने का आरोप है। इस्तीफे के बाद जांच में मामला खुला और उसे Kanpur से गिरफ्तार किया गया।

Fake Experience Certificate CEO Arrested: नौकरी पाने के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते, लेकिन मध्य प्रदेश के ग्वालियर का एक मामला वाकई हैरान करने वाला है। देवेंद्र कुमार दुबे नाम के शख्स ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और जाली बैंक स्टेटमेंट के दम पर ग्वालियर की एक ऑटोमोबाइल कंपनी में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट की नौकरी हासिल कर ली। उसने दावा किया था कि वह पहले 'लैंडमार्क ग्रुप' में काम कर चुका है और उसकी महीने की सैलरी करीब 2.8 लाख रुपये थी। कंपनी उसके काम से इतनी प्रभावित हुई कि बाद में उसे ग्रुप सीईओ (आफ्टरसेल्स) का बड़ा पद सौंप दिया गया।

Gwalior Job Fraud: फर्जी दस्तावेज से मिली नौकरी

पुलिस के अनुसार, दुबे 20 अगस्त 2025 को श्रीतुलजा भवानी ऑटोमोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड में ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट के पद पर शामिल हुआ था। उसने लैंडमार्क ग्रुप का अनुभव प्रमाण पत्र और ₹2.8 लाख से ज्यादा की सैलरी दिखाने वाला बैंक स्टेटमेंट कंपनी को दिया। इन दस्तावेजों के आधार पर कंपनी को लगा कि दुबे पहले एक बड़े बिजनेस ग्रुप में वरिष्ठ पद पर काम कर चुका है। इसी अनुभव के आधार पर उसे नौकरी मिली।

फुल-एंड-फाइनल सेटलमेंट के दौरान खुला राज

देवेंद्र ने करीब 9 महीने तक इस पद पर काम किया और मई 2026 में इस्तीफा दे दिया। खेल तब खुला जब कंपनी ने उसके जाने के बाद 'फुल-एंड-फाइनल सेटलमेंट' के लिए उसके पुराने दस्तावेजों की रूटीन जांच शुरू की। जब कंपनी ने लैंडमार्क ग्रुप से संपर्क किया, तो पता चला कि दुबे नाम का कोई शख्स वहां कभी काम ही नहीं करता था। उसके द्वारा जमा किए गए ₹2,80,670 की सैलरी दिखाने वाले बैंक स्टेटमेंट और एक्सपीरियंस लेटर पूरी तरह से जाली निकले, जिन पर उसी के फर्जी हस्ताक्षर पाए गए। इसके बाद कंपनी ने ग्वालियर क्राइम ब्रांच में शिकायत की। पुलिस ने धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने व इस्तेमाल करने से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया।

कानपुर से क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ा आरोपी

धोखाधड़ी का खुलासा होते ही कंपनी के प्रबंधन ने तुरंत ग्वालियर क्राइम ब्रांच में मामला दर्ज कराया। हालांकि, तब तक आरोपी ग्वालियर छोड़कर फरार हो चुका था। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) की मदद से उसकी लोकेशन उत्तर प्रदेश के कानपुर में ट्रैक की। क्राइम ब्रांच की एक टीम ने कानपुर के पनकी थाना क्षेत्र स्थित वैष्णवी कुटी में छापेमारी कर उसे दबोच लिया और ग्वालियर ले आई। कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर ये जाली दस्तावेज कहां तैयार किए गए थे और इस फर्जीवाड़े में उसकी मदद किसने की थी।