राज्यसभा में अमित शाह का बड़ा ऐलान, कहा-हर राज्य में लागू करेंगे यूसीसी

Published : Dec 17, 2024, 08:26 PM ISTUpdated : Dec 17, 2024, 11:50 PM IST
amit shah

सार

गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में यूनिफार्म सिविल कोड जल्द लाने का ऐलान किया। उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम पर्सनल लॉ का मुद्दा उठाकर निशाना साधा।

Amit Shah on UCC: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को संविधान चर्चा के दौरान राज्यसभा में जवाब दिया। शाह ने सदन केा बताया कि भाजपा सरकार, यूनिफार्म सिविल कोड जल्द लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि वह देश के सभी राज्यों में इस यूसीसी को लागू कराएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने भी यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने के लिए कई बार कहा है लेकिन कांग्रेस ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ हिंदू कोड बिल ला दिया लेकिन समान नागरिक कानून लाना नहीं चाहती है।

शाह ने यूसीसी को लेकर कांग्रेस पर बोला हमला

राज्यभा में आमित शाह ने मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यह स्पष्ट करे कि देश में एक कानून होना चाहिए या नहीं। कांग्रेस ने तुष्टिकरण की नीति अपनाते हुए मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ हिंदू कोड बिल भी ला दिया। हिंदू कोड बिल में कोई पुराना नियम नहीं है। इन्होंने सामान्य कानून को ही हिंदू कोड बिल का नाम दे दिया। चलो मान लिया कि पर्सनल लॉ होना चाहिए। तो पूरा शरिया लागू करिए। विवाह और तलाक के लिए पर्सनल लॉ से ही तुष्टिकरण की शुरुआत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार यूसीसी लाने की बात कही है। आप तुष्टिकरण नहीं ला सकते। हमने ही उत्तराखंड में यूसीसी लाने का काम किया है। अन्य राज्यों में भी हम लाएंगे। समाज में बदलाव के लिए हम कानून लाएंगे और चर्चा कर उसे लागू भी करेंगे। बदलाव के लिए जो सुझाव आएंगे, उस पर विचार कर हर राज्य में बीजेपी की सरकार इसे लाएगी।

शाह ने कहा कि हम तीन आपराधिक न्याय कानून लेकर आए। पीएम नरेंद्र मोदी ने इन कानूनों को लाकर आपराधिक न्याय प्रणाली का भारतीयकरण किया। अगर किसी ने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने का काम किया तो वे पीएम मोदी हैं। राज्यसभा में अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान में 77 बार संशोधन किया, भाजपा ने केवल 22 बार। 18 जून 1951 को पहली बार संविधान में संशोधन किया गया था। संविधान समिति ने यह संशोधन इसलिए किया क्योंकि कांग्रेस पार्टी आम चुनावों का इंतज़ार नहीं करना चाहती थी। अभिव्यक्ति की आज़ादी को सीमित करने के लिए संविधान में अनुच्छेद 19A जोड़ा गया।

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