
नई दिल्ली। केंद्र सरकार संसद के आने वाले मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) को लेकर बिल लाने वाली है। इससे पहले सोमवार को कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर संसद की स्थायी समिति की बैठक बुलाई गई है। बैठक में UCC को लेकर सभी हितधारकों के विचार लिए जाएंगे।
संसदीय समिति के प्रमुख और भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने बैठक के बारे में कहा कि हम UCC मामले में सभी हितधारकों के विचार लेंगे। इस संसदीय समिति में सभी दलों के सदस्य हैं। UCC में देश के सभी नागरिकों के लिए एक जैसा व्यक्तिगत कानून बनाने और लागू करने का प्रस्ताव है। चाहे वे किसी भी धर्म या जेंडर के हों। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।
14 जुलाई तक लोग यूसीसी पर भेज सकते हैं अपनी राय
14 जून को लॉ कमिशन ऑफ इंडिया ने यूसीसी पर जनता और धार्मिक संगठनों से राय मांगी थी। इस संबंध में लोग और संगठन 14 जुलाई तक अपनी राय भेंज सकते हैं। केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने विश्वास जताया है कि कई राजनीतिक दल यूसीसी के मुद्दे पर बीजेपी का समर्थन करेंगे। पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश में जनसभा के दौरान देश में यूसीसी लागू करने की जरूरत पर बल दिया था। इसके बाद से इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत आती है UCC
गौरतलब है कि समान नागरिक संहिता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के अंतर्गत आती है। इसमें कहा गया है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। संविधान के इसी अनुच्छेद का जिक्र करते हुए रविवार को बसपा प्रमुख मायावती ने कहा था कि उनकी पार्टी यूसीसी लागू करने का समर्थन करती है, लेकिन यह जबरन नहीं किया जाना चाहिए। यूसीसी को सबकी सहमति से लागू किया जाना चाहिए।
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