
कोलकाता। जीवन बीमा कंपनी LIC अपने पॉलिसी के प्रचार के लिए 'जीवन के साथ भी जीवन के बाद भी' वाक्य का प्रचार करती है। इसका मतलब है कि पॉलिसी का लाभ खरीदने वाले को जीवन के दौरान मिलेगा और अगर उसकी मौत हो जाती है तो उसके परिवार को सहायता मिलेगी। ईडी (Enforcement Directorate) ने जानकारी दी है कि पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी के बीच भी कुछ ऐसा ही रिश्ता था।
शिक्षक भर्ती घोटाला केस की जांच कर रही ईडी ने खुलासा किया है कि अर्पिता मुखर्जी और पार्थ चटर्जी के बीच बेहद गहरे संबंध थे। अर्पिता ने अपनी LIC पॉलिसी में नॉमिनी के रूप में पार्थ चटर्जी का नाम लिखा था। दरअसल, LIC पॉलिसी में नॉमिनी के नाम का खास महत्व होता है। अगर किसी कारण से पॉलिसी धारक का निधन हो जाता है तो पैसे नॉमिनी को मिलते हैं।
2012 से है करीबी संबंध
ईडी ने कहा है कि पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी ने 1 जनवरी 2012 को एपीए यूटिलिटी सर्विसेज के तहत पार्टनरशिप की थी। इसके बाद आरोपियों ने यूटिलिटी सर्विसेज के नाम पर संपत्ति खरीदी। इन्होंने कुछ संपत्ति नकद पैसे देकर खरीदे। इसके लिए पैसे कहां से आए इसकी जांच की जा रही है। अर्पिता मुखर्जी के घर की तलाशी के दौरान ईडी को ADSR बोलपुर ऑफिस में रजिस्टर्ड एक कॉन्वेयंस डीड मिला था। जांच एजेंसी द्वारा जब्त किए गए दस्तावेज से पता चला कि अर्पिता और पार्थ के करीबी संबंध कम से कम 2012 से हैं। इनके बीच वित्तीय लेनदेन 2012 से चल रहा है।
ईडी ने अर्पिता के घर से बरामद किया है पैसा
गौरतलब है कि कोलकाता की एक विशेष अदालत ने शिक्षा घोटाला मामले में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को 5 अगस्त तक ईडी हिरासत में भेजा है। ईडी ने 22 जुलाई को अर्पिता मुखर्जी के घर पर छापा मारा था और 21.90 करोड़ रुपए नकद बरामद किए थे। जांच एजेंसी ने 56 लाख रुपए की विदेशी मुद्रा और 76 लाख रुपए का सोना भी बरामद किया था।
कुछ दिनों बाद ईडी ने अर्पिता मुखर्जी के दूसरे अपार्टमेंट से 28.90 करोड़ रुपए नकद, 5 किलो से अधिक सोना और कई दस्तावेज बरामद किए। बरामद राशि शिक्षक भर्ती घोटाले से अपराध की आय होने का संदेह है। अर्पिता मुखर्जी ने कहा था कि कोलकाता में उनके घरों से जो पैसा बरामद हुआ है, वह उनका नहीं है। यह उनकी गैरमौजूदगी में रखा गया था।
पार्थ चटर्जी ने कहा था- बरामद पैसे नहीं हैं मेरे
एजेंसी ने पिछले महीने शिक्षा घोटाले में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में चटर्जी को गिरफ्तार किया था। चटर्जी के पास शिक्षा विभाग था। ईडी घोटाले में शामिल मनी ट्रेल की जांच कर रही है। पार्थ चटर्जी ने संवाददाताओं से कहा था कि बरामद किया गया धन उनका नहीं है और केवल समय ही बताएगा कि किसने उनके खिलाफ "साजिश" की है। उन्होंने कहा था कि वह "इस तरह के सौदों में कभी शामिल नहीं हुए"। शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद तृणमूल कांग्रेस ने पार्थ चटर्जी को निलंबित कर दिया और उन्हें मंत्रालय से हटा दिया गया था।
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