
Mann Ki Baat: आज नवरात्रि का छठवां दिन है। इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 126वें एपिसोड में देशवासियों से सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, परंपराओं, स्वतंत्रता सेनानियों और नारी शक्ति के योगदान पर विस्तार से बात की। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि सरकार छठ महापर्व को यूनेस्को की सूची में शामिल किया जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह 100 साल पुरानी यात्रा न केवल महत्वपूर्ण बल्कि प्रेरणादायक भी है। उन्होंने याद दिलाया कि सौ साल पहले, जब आरएसएस की स्थापना हुई थी, तब हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था। इस लंबे समय की गुलामी ने हमारे आत्मविश्वास और स्वाभिमान को चोट पहुंचाई थी और लोगों में हीन भावना पैदा कर दी थी। इसलिए देश की स्वतंत्रता के साथ-साथ यह भी जरूरी था कि देश वैचारिक गुलामी से मुक्त हो। इसी उद्देश्य से के बी हेडगेवार ने 1925 में आरएसएस की स्थापना की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु गोलवलकर ने इस राष्ट्र सेवा के मिशन को आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि निःस्वार्थ सेवा और अनुशासन ही संघ की असली ताकत हैं। पिछले 100 वर्षों से आरएसएस के स्वयंसेवक लगातार राष्ट्र की सेवा में लगे हुए हैं। जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो आरएसएस के स्वयंसेवक सबसे पहले वहां पहुंचते हैं और उनके हर कार्य में राष्ट्र प्रथम की भावना नजर आती है।
पीएम मोदी ने नवरात्रि का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय हम शक्ति की पूजा करते हैं और नारीशक्ति का उत्सव मनाते हैं। उन्होंने नाविका सागर परिक्रमा में साहस और अडिग संकल्प दिखाने वाली महिला नौसेना अधिकारियों, लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारे त्योहार हमारी संस्कृति को जीवित रखते हैं। छठ पूजा में डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर उनका सम्मान किया जाता है। यह पर्व अब केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर मनाया जाने लगा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार छठ महापर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल कराने की कोशिश कर रही है। जब यह शामिल होगा, तो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोग इस त्योहार की भव्यता और दिव्यता का अनुभव कर सकेंगे।
इसी दौरान उन्होंने प्रसिद्ध असमिया गायक जुबीन गर्ग को भी याद किया, जिनका हाल ही में सिंगापुर में आकस्मिक निधन हो गया था। प्रधानमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बताया कि जुबीन का असम की संस्कृति से गहरा जुड़ाव था।
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