पंबन ब्रिज के उद्घाटन पर पीएम मोदी का तमिल नेताओं पर तंज, बोले- सिग्नेचर भी तमिल में नहीं करते

Published : Apr 06, 2025, 03:41 PM IST
PM Modi in Rameshwaram

सार

PM Modi Rameshwaram Visit:रामेश्वरम में पंबन रेलवे ब्रिज के उद्घाटन पर पीएम नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के विपक्षी नेताओं को घेरा। कहा- मेडिकल शिक्षा तमिल में शुरू करें ताकि गरीब बच्चे भी डॉक्टर बन सकें।

PM Modi Rameshwaram Visit: रामेश्वरम में पंबन रेलवे ब्रिज का उद्घाटन करने पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के विपक्षी नेताओं पर जमकर भड़ास निकाली। पीएम मोदी ने कहा कि तमिलनाडु के नेता अपना सिग्नेचर तमिल में नहीं करते हैं और भाषा विवाद पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार को तमिल भाषा में मेडिकल कोर्स शुरू करना चाहिए ताकि गरीब के बच्चे भी डॉक्टर बनें।

रामेश्वरम पहुंचे पीएम मोदी ने सबसे पहले यहां के रामनाथ स्वामी मंदिर में पूजा की। वह श्रीलंका दौरे से सीधे रामेश्वरम पहुंचे हैं। श्रीलंका से लौटते समय उन्होंने रामसेतु का वीडियो पोस्ट करते हुए रामनवमी की बधाई दी और प्रभु श्रीराम को याद किया। प्रधानमंत्री ने पोस्ट में लिखा कि श्रीलंका से लौटते हुए विमान से रामसेतु के दर्शन किए। यह तभी हुआ, जब अयोध्या के राम मंदिर में रामलला का सूर्य तिलक हो रहा था। यह दिव्य अनुभव था। प्रभु श्रीराम हम सभी को जोड़ने वाली शक्ति हैं। उनकी कृपा सदैव हम पर बनी रहे।

एनईपी को लेकर विवाद पर तमिल नेताओं को घेरा

पीएम नरेंद्र मोदी ने एनईपी को लागू करने के विवाद पर तमिल नेताओं को घेरते हुए कहा कि मैं तो कभी-कभी हैरान हो जाता हूं जब तमिलनाडु के कुछ नेताओं की चिट्ठियां मेरे पास आती हैं। कभी कोई नेता तमिल भाषा में सिग्नेचर नहीं करता। तमिल का गौरव हो, कम से कम तमिल में सिग्नेचर तो करो।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया में भारत के प्रति आकर्षण बढ़ा है। लोग भारत आना चाहते हैं, भारत को समझना चाहते हैं। तमिल भाषा और धरोहर दुनिया के कोने-कोने में पहुंचे। इसके लिए सरकार कोशिश कर रही है। मैं मानता हूं 21वीं सदी में इस महान परंपरा को और आगे ले जाना है। मुझे विश्वास है रामेश्वरम और तमिलनाडु की ये धरती हमें नई प्रेरणा देती रहेगी।

सरकार तमिल में मेडिकल कोर्स क्यों नहीं शुरू करती?

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि तमिलनाडु में 1400 से ज्यादा जनऔषधि केंद्र हैं। यहां 80 फीसदी डिस्काउंट पर दवाएं मिलती हैं। इससे भी तमिलनाडु के लोगों की 7 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई। देश के नौजवानों को डॉक्टर बनने के लिए विदेश जाने की मजबूरी नहीं रहे। इसके लिए बीते सालों में तमिलनाडु को 11 मेडिकल कॉलेज मिले हैं। अब गरीब से गरीब बेटा-बेटी भी डॉक्टर बने सकते हैं। मैं तमिलनाडु सरकार से कहना चाहता हूं कि वे तमिल भाषा में मेडिकल कोर्स जारी करें ताकि अंग्रेजी ने जानने वाले गरीब परिवार के बेटे-बेटी भी डॉक्टर बन सकें।

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