
नई दिल्ली। हड़प्पा सभ्यता (Harappa civilization) के प्राचीन नगर धौलावीरा (Dholavira) को विश्व धरोहर के रूप में यूनेस्को (UNESCO) ने चिंहित किया है। गुजरात (Gujrat) का यह चौथा और भारत का चालीसवां ऐतिहासिक धरोहर है जिसे वर्ल्ड हेरिटेज साइट (World Heritage site) में शामिल किया गया है। यूनेस्को के ऐलान के बाद पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर खुशी जताई है साथ ही यहां से जुड़ी अपनी यादें भी साझा की है।
छात्र जीवन से रहा है धौलावीरा से रिश्ता
पीएम मोदी ने यूनेस्को की पोस्ट को साझा करते हुए टिप्पणी की है कि इस खबर से बिल्कुल खुश हूं। धोलावीरा एक महत्वपूर्ण शहरी केंद्र था और हमारे अतीत के साथ हमारे सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक है। यह विशेष रूप से इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व में रुचि रखने वालों के लिए एक यात्रा है।
पीएम ने ट्वीट किया कि मैं अपने छात्र दिनों में पहली बार धोलावीरा गया था। उस जगह से मंत्रमुग्ध हो गया था। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में, मुझे धोलावीरा में विरासत संरक्षण और जीर्णोद्धार से संबंधित पहलुओं पर काम करने का अवसर मिला। हमारी टीम ने वहां पर्यटन के अनुकूल बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए भी काम किया।
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कहां है धौलावीरा?
धौलावीरा गुजरात में कच्छ क्षेत्र में है। इतिहासकारों व पुरातत्वविद्ों के अनुसार यह कच्छ के खडीर में स्थित एक ऐतिहासिक स्थान है, जो लगभग पांच हजार साल पहले विश्व का प्राचीन महानगर था। हड़प्पा सभ्यता से जुड़ा धौलावीरा ‘कच्छ के रण‘ के मध्य स्थित द्वीप ‘खडीर‘ में स्थित है। धौलावीरा गांव ‘खडीर द्वीप‘ की उत्तरी-पश्चिमी सीमा पर बसा है। धौलावीरा पुरास्थल की खुदाई में मिले अवशेषों का प्रसार ‘मनहर‘ एवं ‘मानसर‘ नामक नालों के बीच में हुआ था। इस नगर की लम्बाई पूरब से पश्चिम की ओर है। नगर के चारों तरफ एक मजबूत दीवार के निर्माण के साक्ष्य मिले हैं।
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