
PM Modi interview with Nikkei Asia: जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने हिरोशिमा जाने के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निक्केई एशिया से बातचीत करते हुए कहा कि एशियाई देशों की आवाज वह वैश्विक स्तर पर प्रमुखता से उठाते रहेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि वह ग्लोबल साउथ की चिंताओं को जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रमुखता से उठाएंगे। साथ ही वह जी20 के व्यापक समूह के साथ इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे। भारत इस साल जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
नई दिल्ली स्थित पीएमओ में निक्केई एशिया के साथ स्पेशल बातचीत में शुक्रवार को पीएम मोदी ने कहा कि वह ऊर्जा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में ग्लोबल चेंजस और चैलेंजस पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा, "मैं इन चुनौतियों से निपटने में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की भूमिका पर जोर दूंगा।" उन्होंने कहा कि भारत का एक्सपीरियंस मीटिंग में काफी मजबूती से रेसोनेट होगा।
जापान ने आमंत्रित किया, भारत जी-7 का सदस्य नहीं...
दरअसल, भारत G-7 का सदस्य नहीं है लेकिन इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहे जापान की ओर से वहां के पीएम फुमिया किशिदा ने आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री फुमिया किशिदा, लगातार ग्लोबल साउथ या विकासशील दुनिया के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए अपना दृढ़ संकल्प व्यक्त करते रहे हैं। मोदी ने कहा कि जापान और भारत के लोकतंत्र, स्वतंत्रता और कानून के शासन के साझा मूल्य स्वाभाविक रूप से उन्हें करीब लाए हैं।
बता दें कि पीएम मोदी का निक्केई एशिया के साथ यह इंटरव्यू आंशिक रूप से लिखित और आंशिक रूप से व्यक्तिगत रूप से लिया गया। इस इंटरव्यू में भारत-जापान के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि अब हम अपने राजनीतिक, सामरिक, सुरक्षा और आर्थिक हितों में एक साथ बढ़ते हुए देख सकते हैं।"
भारत यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस की खिलाफत नहीं किया
भारत व विकसित देशों के बीच तमाम साझा हितों के बावजूद कई बिंदुओं पर संभावित टकराव भी हिरोशिमा में संभावित है। दरअसल, भारत ने यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भी रूस की स्पष्ट रूप से निंदा नहीं किया है। जी -7 देशों के इस शिखर सम्मेलन का एक फोकस मास्को पर प्रतिबंधों को और कड़ा करना भी है। हालांकि, मोदी ने बार-बार शांति का आह्वान किया है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने वह साफ तौर पर कह चुके हैं कि आज का युग युद्ध का युग नहीं है। परंतु, पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत रूस के साथ अपने व्यापार को जारी रखे हुए है।
क्या भारत मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगा?
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है, पीएम मोदी ने कहा कि यूक्रेन विवाद पर उनके देश की स्थिति स्पष्ट और अटल है। भारत शांति के पक्ष में खड़ा है, और दृढ़ता से रहेगा। हम उन लोगों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विशेष रूप से भोजन, ईंधन और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण चुनौतियों का सामना करते हैं।
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