
मुंबई. मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी को उनके घर से सुबह करीब 6.30 बजे गिरफ्तार कर लिया। उन्हें पहले क्राइम ब्रांच ऑफिस, इसके बाद अलीबाग पुलिस स्टेशन ले जाया गया। केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गिरफ्तारी की निंदा की। उन्होंने इसे प्रेस की आजादी पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना ने देश को आपातकाल की याद दिला दी। जब प्रेस के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया था।
अमित शाह ने कहा, यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला हैअमित शाह ने ट्वीट किया, कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर लोकतंत्र को शर्मसार किया है। रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी के खिलाफ राज्य की सत्ता का दुरुपयोग व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला है। यह हमें आपातकाल की याद दिलाता है। यह फ्री प्रेस पर हमला है और इसका विरोध होगा।
प्रेस की आजादी पर हमला जायज नहीं- रामदेव
बाबा रामदेव ने कहा, देश के वरिष्ठ पत्रकार अर्णव गोस्वामी जी की जिस तरह से गिरफ्तारी और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, वह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक व अमानवीय है, प्रेस की आजादी पर यह हमला किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता, मैं महाराष्ट्र सरकार से अपील करता हूं कि वह इस पर संज्ञान ले ताकि किसी भी तरीके से अन्याय नहीं हो।
यह आपातकाल की तरह- एस जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, 'आपातकाल की तरह, अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है। जो लोग वास्तव में इस स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं, उन्हें अवश्य बोलना चाहिए!'
कांग्रेस तो लोकतंत्र का गला घोंटती है- योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, 'कांग्रेस तो लोकतंत्र का गला घोंटती है। 1975 में इसने देश में इमरजेंसी थोपी थी और आज भी आपने देखा होगा देश के एक बहुत बड़े पत्रकार को केवल अपने स्वयं के तुष्टि के लिए गिरफ्तार करके लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करने का कार्य कांग्रेस कर रही है। कांग्रेस अपनी नाकामी को छिपाने के लिए देश के अंदर अराजकता पैदा करने का कार्य कर रही है। देश में अराजकता पैदा करने की छूट हमें किसी को नहीं देनी चाहिए।'
स्मृति ईरानी ने कहा, आप चुप हैं तो दमन के समर्थक हैं
गिरफ्तारी पर स्मृति ईरानी ने कहा, फ्री प्रेस के लिए जो लोग अर्नब के समर्थन में खड़े नहीं हैं, वह फासीवाद के समर्थन में हैं। आप उन्हें पसंद नहीं करते, उन्हें स्वीकार नहीं करते, उसके अस्तित्व को तुच्छ समझ सकते हैं लेकिन यदि आप चुप रहते हैं तो आप दमन का समर्थन करते हैं। अगर आप आगे होंगे तो आपके समर्थन में कौन बोलेगा।
रविशंकर प्रसाद ने कहा, गंभीर रूप से निंदनीय, अनुचित है
रविशंकर प्रसाद ने ट्वीट किया, वरिष्ठ पत्रकार अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी गंभीर रूप से निंदनीय, अनुचित और चिंताजनक है। हमने 1975 के आपातकाल का विरोध करते हुए प्रेस की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी थी।
जेपी नड्डा ने कहा, अर्नब की गिरफ्तारी बेहद शर्मनाक है
भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा, स्वतंत्र प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति महाराष्ट्र सरकार के अर्नब गोस्वामी की गिरफ्तारी और उत्पीड़न पर गुस्सा है। यह सोनिया और राहुल गांधी द्वारा निर्देशित उन लोगों को चुप कराने का एक और उदाहरण है जो उनसे असहमत हैं। शर्मनाक!
संबित पात्रा ने कहा, झूठ के खिलाफ आवाज उठाना ही होगा
भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, अर्नब गोस्वामी के साथ आज जो हुआ वह कल आपके साथ भी हो सकता है अगर आप झूठ के खिलाफ आवाज नहीं उठाते हैं!
यह इंदिरा गांधी के आपातकाल की याद दिलाता है- अनुराग ठाकुर
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी अर्नब की गिरफ्तारी पर महाराष्ट्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, 'क्या स्वयं के लिए प्रेस की स्वतत्रंता को टॉर्चर करेंगे? क्या लोकतंत्र की हत्या के नारे बोलेंगे? राज्य सत्ता के दुरुपयोग के मद्देनजर "तटस्थ" और "चुप" बने रहना वामपंथी उदारवादियों के पाखंड को उजागर करता है।' उन्होंने कहा, 'रिपब्लिक पर ताबड़तोड़ कार्रवाई और अर्नब की सख्त गिरफ्तारी पर इंदिरा गांधी के आपातकाल की याद दिलाता है। बोलने की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म कर दिया गया है। यह सोनिया गांधी की आपातकालीन स्थिति है। उनकी चुप्पी बोलती है।'
अनिल बिज ने कहा, महाराष्ट्र सरकार का हाल कांग्रेस जैसा होगा
हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा, अर्नब गोस्वामी पर महाराष्ट्र पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई देश की स्वतंत्र मीडिया पर हमला है। आपातकाल के समय भी कांग्रेस ने मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया था और लोगों ने कांग्रेस को वापस जमीन पर ला दिया था। ऐसा ही अब महाराष्ट्र सरकार के साथ होने जा रहा है।
मिनाक्षी लेखी ने कहा, अर्नब की गिरफ्तारी फांसीवाद का संकेत है
भाजपा सांसद मिनाक्षी लेखी ने कहा, यह फांसीवाद के संकेत। एक दुश्मन की पहचान (अर्नब गोस्वामी) एकीकरण का कारण है। इसका मतलब अभिव्यक्ति की आजादी मीडिया के दमन का कारण बन सकती है। लेकिन मानवाधिकारों के चैंपियन अब क्यों चुप हैं। हर किसी के मानवाधिकार मायने रखते हैं। भले ही आप सहमत न हों।
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