
नई दिल्ली। भारत में सांप्रदायिक दंगों में लगातार कमी देखी जा रही है। पिछले 50 सालों में देश एक शांतिपूर्ण माहौल की ओर बढ़ रहा है। सेंटर फॉर सिस्टमेटिक पीस के पांच दशकों के सांप्रदायिक दंगों का लेखा जोखा यह साफ करता है कि देश में लगतार दंगों की कमी आ रही है। प्रधानमंत्री की आर्थिक एडवाइजरी कमेटी की सदस्य प्रो.शमिका रवि ने एक रिसर्च रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट को उन्होंने सेंटर फॉर सिस्टमेटिक पीस संस्था के सोर्स के आधार पर तैयार किया है।
पांच दशकों में आई दंगों में काफी कमी
प्रो.शमिका कहा कि भारत में दंगों (हिंसा) में लगातार कमी आ रही है। देश 50 वर्षों में सबसे शांतिपूर्ण स्थिति में है। डेटा से यह स्पष्ट है कि देश में अब दंगों की कोई जगह नहीं। उन्होंने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि 1998 के बाद से भारत में दंगे और तनाव की स्थितियों में बहुत तेजी से काबू पाने के साथ इसमें गिरावट आई है।
1953 से 2006 तक दंगों का चार्ट
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार कमेटी की सदस्य प्रो.शमिका रवि ने अपनी ट्वीटर हैंडल पर एक चार्ट शेयर किया गया है। इस चार्ट को पेश करते हुए उन्होंने बताया कि 1953 में भारत में दस हजार से भी कम थे लेकिन यह आंकड़ा 60 के दशक में आते आते 30 हजार के पार हो गया। 70 के दशक में यह देश में दंगों की संख्या में लगातार इजाफा होता गया। 1975 तक यह 80 हजार के आसपास पहुंच गया। हालकि, देश में इमरजेंसी के दौरान यह संख्या कम हुई। लेकिन 60 हजार से कम नहीं हुआ। 80 के दशक में देश में दंगों की स्थिति विकराल हो गई। यह संख्या एक लाख के आंकड़ों को पार करने लगी। 90 के दशक में भी दंगे कम नहीं हुए। प्रो.शमिका रवि द्वारा शेयर किए गए चार्ट के अनुसार, 1995 से 2006 तक दंगों में काफी गिरावट आई और यह संख्या 60 हजार के आसपास तक पहुंच गई।
प्रो.शमिका रवि का दावा-एनसीआरबी ने दर्ज किए 80 के दशक में सबसे अधिक दंगे के मामले
प्रोफेसर शमिका रवि ने एक चार्ट से 70 से अभी तक के दंगों पर हुए एफआईआर का चार्ज सामने लाया है। उन्होंने ट्वीटर हैंडल पर चार्ट पोस्ट कर बताया कि एनसीआरबी ने 80 के दशक में देश में हुए दंगों के सबसे अधिक मामले दर्ज किए हैं। इसके बाद 90 के दशक में देश में सबसे अधिक दंगों का केस दर्ज किया गया है। 60 व 70 के दशक में दंगों की संख्या 60 से 80 हजार के आसपास है तो उसके बाद यह संख्या एक लाख के आंकड़े को पार करता दिख रहा है। हालांकि, 1995 के बाद देश में दंगों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मनमोहन सिंह सरकार के दोनों कार्यकाल में भी समानरूप से दंगों में कमी दर्ज की गई। तो मोदी सरकार में भी यह तेजी से नीचे की ओर आंकड़ा भाग रहा।
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