लिव-इन रिलेशन में विवाहित पुरुष के साथ रह रही थी महिला, हाईकोर्ट ने कही बड़ी बात

Published : Jul 27, 2024, 04:00 PM ISTUpdated : Jul 27, 2024, 06:05 PM IST
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सार

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका एक 40 वर्षीय महिला और 44 साल के पुरुष ने दायर की थी।

चंडीगढ़: लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे विवाहित लोगों के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नसीहत दी है। हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशन में रहने वाले विवाहित लोगों को सुरक्षा देने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा करना गंदा काम करने वालों को प्रोत्साहित करना और द्विविवाह प्रथा को बढ़ावा देने के समान होगा। कोर्ट ने घर छोड़कर शादी करने वाले जोड़ों को भी फटकारा। बेंच ने कहा कि ऐसे जोड़े जो अपने माता-पिता के घर से भाग जाते हैं, वे न केवल अपने परिवारों को बदनाम करते हैं बल्कि अपने माता-पिता के सम्मान और गरिमा के साथ जीने के अधिकार का भी उल्लंघन करते हैं।

क्यों विवाहितों को लिव-इन रिलेशन पर की कठोर बात?

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट शुक्रवार को एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका एक 40 वर्षीय महिला और 44 साल के पुरुष ने दायर की थी। इन लोगों ने कोर्ट से अपनी सुरक्षा के लिए अपील की। दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे लेकिन परिवारवाले लगातार जान-माल की धमकी दे रहे।

कोर्ट में याचिका में बताया गया कि पुरुष विवाहित है और उसके दो बच्चे हैं। जबकि महिला अपने पति से तलाक ले ली है। पुरुष के तलाक नहीं लेने जानकारी होने के बाद कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशन में रह रहे व्यक्ति ने अपनी पहली पत्नी से तलाक नहीं लिया है। उसके दो बच्चे हैं। याचिकाकर्ताओं को पूरी तरह से पता था कि वे पहले से विवाहित हैं और वे लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं रह सकते।

कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के बीच अगर लिव-इन रिलेशनशिप की प्रकृति विवाह जैसा है तो बेंच कोई मदद नहीं कर सकता। कोर्ट ने अगर आपको सुरक्षा दे दिया तो यह पत्नी और दो बच्चों के साथ अन्याय होगा।

विवाह संरक्षण देने वाली संस्था

हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह एक महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था है। यह सुरक्षा प्रदान करती है और बच्चों के पालन-पोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक व्यक्ति को शांति, सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार है लेकिन इस प्रकार की याचिकाओं को अनुमति देकर हम गलत काम करने वालों को प्रोत्साहित कर रहे हैं और द्विविवाह की प्रथा को बढ़ावा दे रहे हैं। यह आईपीसी की धारा 494 के तहत एक अपराध है। केवल इसलिए कि दो व्यक्ति कुछ दिनों से एक साथ रह रहे हैं, यह उनके लिव-इन रिलेशनशिप के दावे को मान्य करने के लिए पर्याप्त नहीं है। पुलिस को उन्हें सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश देना अप्रत्यक्ष रूप से इस तरह के अवैध संबंध को हमारी सहमति देता है।

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