Puri Accident Mystery: पुरी के बड़े डंडा इलाके में एक तेज़ रफ्तार बोलेरो ने पीछे से स्कूटर को टक्कर मारी, जिसमें 5 साल के श्रेयंश डे की मौत हो गई। क्या ड्राइवर नशे में था? गुस्साए लोगों ने सड़क जाम की, पुलिस जांच जारी, CM ने 4 लाख मुआवज़ा घोषित किया।
हादसा या लापरवाही? पुरी सड़क दुर्घटना ने खोली सिस्टम की पोल
Bada Danda Accident Puri: पुरी का बड़ा डंडा इलाका, जो हमेशा श्रद्धालुओं और वाहनों की चहल-पहल से भरा रहता है, शुक्रवार सुबह अचानक मातम और तनाव का केंद्र बन गया। पुरी सड़क हादसा, बड़ा डंडा एक्सीडेंट और नाबालिग की मौत जैसे शब्द अब लोगों की जुबान पर हैं। क्या यह सिर्फ एक हादसा था या फिर सिस्टम की लापरवाही का नतीजा?
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बड़ा डंडा में हादसा आखिर कैसे हुआ?
जानकारी के मुताबिक, बालगंडी चौक के पास एक बोलेरो एसयूवी ने पीछे से एक स्कूटर को जोरदार टक्कर मार दी। स्कूटर पर 5 साल का मासूम श्रेयंश डे अपने दादा के साथ जा रहा था। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोग तुरंत उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई।
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क्या नशे में था बोलेरो चालक?
मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि ड्राइवर तेज रफ्तार में था और नशे की हालत में गाड़ी चला रहा था। बड़ा डंडा इलाके में पहले भी तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग की शिकायतें होती रही हैं।
मासूम की मौत की खबर फैलते ही इलाके में गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने मेडिकल चौक पर टायर जलाकर सड़क जाम कर दी। प्रदर्शनकारियों ने शव को सड़क पर रखकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। मांग साफ थी-पीड़ित परिवार को मुआवजा, दोषी ड्राइवर पर सख्त कार्रवाई और ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन।
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पुलिस और प्रशासन की क्या रही भूमिका?
सूचना मिलते ही पुरी एसपी प्रतीक सिंह समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बोलेरो एसयूवी को जब्त कर लिया है और ड्राइवर को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। कुम्हारपाड़ा पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
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क्या मिलेगा परिवार को इंसाफ?
घटना पर दुख जताते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मृतक बच्चे के परिजनों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। हालांकि लोगों का कहना है कि सिर्फ मुआवजा काफी नहीं, ज़रूरी है कि ऐसी घटनाओं को रोका जाए। पुरी का बड़ा डंडा हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है-अगर अब भी नियमों और जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो अगला शिकार कोई और मासूम हो सकता है।