
Raghuram Rajan comment over Sikh Riots and Indira Gandhi assassination: आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का एक बयान विवाद का कारण बन चुका है। पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने 1984 के सिख विरोधी दंगों को तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी की उनके बॉडीगार्ड्स द्वारा हत्या से जोड़कर उचित ठहराया था। उनके इस बयान से तीखी बहस छिड़ गई है। आलोचकों ने राजन पर दंगों में कांग्रेस पार्टी की संलिप्तता को नजरअंदाज करने और उनके फैसले की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का आरोप लगाया है।
क्या है रघुराम राजन के वायरल वीडियो में?
दरअसल, पूर्व गवर्नर रघुराम राजन एक मीडिया हाउस से बातचीत के दौरान तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के विजन को लेकर बात कर रहे थे। श्रीमती गांधी के विजन पर बात करते हुए उन्होंने 1971 को लेकर उनकी तारीफ की। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि गोल्डेन टेंपल वाली घटना के बाद सिख समाज बेहद आक्रोश में था। इंदिरा गांधी के सिक्योरिटी चीफ आरएन काव ने उनको सिख गार्ड्स हटाने की सलाह दी थी। रघुराम राजन बताते हैं कि जब गोल्डेन टेंपल के अगेंस्ट अटैक हुआ ऑपरेशन ब्लू स्टार तो उनका सिक्योरिटी चीफ आरएन काव था, उन्होंने बताया कि यह जो आपके सिख गार्ड्स हैं उनको दूर कर दो क्योंकि उनकी लॉयल्टी संदिग्ध है। तो उसी समय इंदिरा गांधी ने यह कहा कि जिस पल मैं किसी धर्म विशेष से दूरी बना लूंगी उसी दिन मेरा विजन ऑफ इंडिया खत्म हो जाएगा। इस पर पत्रकार ने कहा कि लेकिन 1984 में उसके बाद दंगे हुए। इस पर रघुराम राजन कहते हैं कि उनका हत्या भी हुआ न उसी सिख गार्ड्स से। लेकिन मैं एक बात कहता हूं कि विजन ऑफ इंडिया का होना बड़ी बात है न।
अब छिड़ गई है बहस
अब रघुराम राजन के इस वीडियो को शेयर कर उनकी आलोचना की जा रही है कि वह दंगों को सही ठहरा रहे हैं। जबकि उनके समर्थक और पूरा इंटरव्यू देखने वालों का तर्क है कि कुछ लोग पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर रघुराम राजन की आलोचना कर रहे हैं। वह केवल दंगों के आसपास के संदर्भ को उजागर कर रहे थे, सामाजिक गतिशीलता पर राजनीतिक उथल-पुथल के प्रभाव पर जोर दे रहे थे। दूसरी ओर विरोधियों का तर्क है कि उनकी टिप्पणियां हिंसा में कांग्रेस पार्टी की भूमिका को नजरअंदाज करती हैं, जो उनके मूल्यांकन में एक संभावित अंध बिंदु को उजागर करती हैं।
वीडियो के जवाब में ट्वीटर पर पत्रकार राहुल रौशन लिखते हैं: कांग्रेस के पास धार्मिक आधार पर कोई भेदभाव न करने का विज़न है इसलिए आरआरआर प्रभावित है, धार्मिक आधार पर पार्टी द्वारा होने वाले दंगों को नज़रअंदाज़ कर रही है। क्या वह केवल "विज़न स्टेटमेंट" को पिच में देखकर किसी उद्यमी को पैसा देगा या वास्तव में संचालन की जांच करेगा और मार्केट परफार्मेंस?
सिख विरोधी दंगा
भारत में 1984 के सिख विरोधी दंगे देश के इतिहास में एक दुखद और काले अध्याय का प्रतिनिधित्व करते हैं। 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा हत्या के बाद, सिख समुदाय के खिलाफ व्यापक हिंसा भड़क उठी। भीड़ ने दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में सिखों को निशाना बनाया जिसके परिणामस्वरूप एक भयानक नरसंहार हुआ। हजारों निर्दोष सिखों को मार डाला गया, महिलाओं पर हमला किया गया और संपत्तियों को नष्ट कर दिया गया।
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