
नई दिल्ली. अभिनेता से नेता बने रजनीकांत ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 'एक राष्ट्र, एक भाषा नीति' के प्रस्ताव के खिलाफ बयान दिया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी दक्षिण भारतीय राज्य हिंदी को थोपना स्वीकार नहीं करेगा। अमित शाह ने हिंदी दिवस के दिन हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बनाने की अपील की थी।
थोपो मत, भाषा का इस्तेमाल एकजुटता के लिए करें : रजनीकांत
- रजनीकांत ने चेन्नई एयरपोर्ट पर कहा, हिंदी को थोपा नहीं जाना चाहिए। सिर्फ तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि दक्षिणी राज्यों में से कोई भी राज्य हिंदी लागू नहीं करेगा। हिंदी ही नहीं, कोई भी एक भाषा लागू नहीं होनी चाहिए। देश की एकता और प्रगति के लिए एक सामान्य भाषा है, लेकिन उसे मजबूर करके स्वीकार्य नहीं करवाना चाहिए।
- रजनीकांत ने कहा, "मत थोपो, भाषा का इस्तेमाल एकजुटता के लिए करें।" अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने भी हाल ही में हिंदी थोपने के खिलाफ बात कही थी।
- सोमवार को पोस्ट किए गए एक वीडियो में हासन ने कहा कि भारतीयों को विविधता में एकता का वादा किया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि 2017 की जल्लीकट्टू विरोध प्रदर्शनों की तुलना में भाषा के लिए लड़ाई बहुत बड़ी होगी।
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