
नई दिल्ली. केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 6 महीने से चल रहे आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। अब दिल्ली के लाल किले पर 26 जनवरी को हुई हिंसा को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। दिल्ली क्राइम ब्रांच ने तीस हजार कोर्ट में पेश की चार्जशीट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह चार्जशीट कुछ दिन पहले कोर्ट में दाखिल की गई है। 3224 पेज की इस चार्जशीट से खुलासा होता है कि आंदोलनकारी लाल किले को प्रदर्शन का नया ठिकाना बनाना चाहते थे। इस दरमियान अकेले पंजाब में 95% ट्रैक्टरों की खरीदी बढ़ गई थी। बता दें कि इस दिन आंदोलित किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली थी। यह जानकारी एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में छापी है।
अचानक नहीं, बल्कि साजिश थी लाल किले की हिंसा
चार्जशीट में कहा गया है कि लाल किले पर हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि पहले से साजिश थी। इसीलिए बुजुर्ग किसानों को आगे किया गया था। उपद्रवियों को मकसद सिर्फ लाल किले पर झंडा फहराना नहीं था, बल्कि वे वहां कब्जा करना चाहते थे। वे लाल किले को एक नया आंदोलनस्थल बनाना चाहते थे। इस मामले में पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था। आंदोलनकारियों ने काफी देर तक लाल किले को बंधक बनाकर रखा था। उन्होंने 26 जनवरी यानी राष्ट्रीय पर्व का दिन इसलिए चुना था, ताकि देश की अस्मिता को दुनियाभर में बदनाम करके मोदी सरकार की किरकिरी कराई जा सके।
किसान की बेटी की कॉल ने खोली पोल
पुलिस ने अपनी चार्जशीट में गिरफ्तार एक किसान की बेटी के इंटरस्पेट कॉल को भी चार्जशीट में शामिल किया है। इसमें वो अपने पिता से कहते सुनी गई कि क्या उन्हें 50 लाख रुपए मिलने वाले हैं? आरोपी किसान इकबाल सिंह ने पुलिस की पूछताछ में माना था कि सिख फॉर जस्टिस ग्रुप ने उसे लाल किले पर निशान साहिब का झंडा लगाने के एवज में पैसे देने का वादा किया था। इसके लिए वो 19 जनवरी को मीटिंग करने तरनतारण गया था।
पंजाब में खरीदे गए बड़ी संख्या में ट्रैक्टर
26 जनवरी को किसान संगठनों ने दिल्ली में ट्रैक्टर रैली का आह्वान किया था। पुलिस के मुताबिक, इसके लिए हरियाणा और पंजाब से बड़ी संख्या में ट्रैक्टर खरीदे गए। पुलिस ने हरियाणा और पंजाब में दिसंबर 2020 और दिसंबर 2019 के दौरान खरीदे गए ट्रैक्टरों का आंकड़ा सर्च किया था। इससे पता चला कि दिसंबर 2019 के मुकाबले पिछले साल दिसंबर में पंजाब में ट्रैक्टरों की खरीद 95% बढ़ गई थी। पुलिस ने ट्रैक्टर एंड मैकेनाइजेशन एसोसिएशन से पंजाब-हरियाणा में हर महीने ट्रैक्टरों की बिक्री के आंकड़े मांगे थे।
26 मई को किसानों ने मनाया था काला दिवस
केंद्र के तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों ने 26 मई को काला दिवस मनाया था। 6 महीने पहले 26 मई को ही किसानों ने आंदोलन शुरू किया था। 26 मई को ही मोदी सरकार ने 7 साल पूरे किए। संयुक्त किसान मोर्चा ने विरोध स्वरूप काले झंडे लगाए थे। किसानों के इस प्रदर्शन को कांग्रेस सहित 14 विपक्षी दलों ने समर्थन दिया था। ये हैं-कांग्रेस, जेडीएस, एनसीपी, टीएमसी, शिवसेना, डीएमके, झामुमो, जेकेपीए, सपा, बीएसपी, आरजेडी, सीपीआई, सीपीएम और आम आदमी पार्टी। भारतीय किसान संघ ने इसका विरोध जताया था। इससे पहले किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर फिर से बातचीत का प्रस्ताव रखा है।
किसान दिल्ली के बॉर्डर पर धरने पर बैठे हैं। इस बीच किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच 11 दौर की बातचीत हुईं, लेकिन बेनतीजा निकलीं। आखिरी दौर की बातचीत 22 जनवरी को हुई थी। केंद्र सरकार कानून में सुधार करने को तैयार है, लेकिन किसान संगठन उन्हें रद्द करने का मांग पर अड़े हुए हैं। इससे पहले केंद्र सरकार ने किसान संगठनों को कई बार बातचीत का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि कानून रद्द होने तक कुछ नहीं होगा।
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