
नई दिल्ली. उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियल फटने के चौथे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। अभी तक 32 शव मिले हैं। जबकि 197 लोग लापता हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में बताया था कि अभी यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि मलबा हटाने में कितना समय लगेगा, क्योंकि सुरंग में 90 डिग्री का मोड़ है। जवाब वैकल्पिक रास्तों की खोज कर रहे हैं।
गृह मंत्री ने कहा, 7 फरवरी के सैटेलाइट डेटा से पता चलता है कि भूस्खलन की वजह से स्नो एवलॉच की स्थिति बनी, जो ऋषि गंगा नदी से 5,600 मीटर की ऊंचाई पर था। हिमस्खलन ने लगभग 14 वर्ग मीटर क्षेत्र को कवर किया था।
टनल के अंदर चौथे दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
एनटीपीसी के तपोवन-विष्णुगढ़ परियोजना में सुरंग के अंदर बचाव कार्य जारी है। 25-35 लोग 2.5 किलोमीटर लंबी 'हेड्रेस टनल' (HRT) के अंदर फंसे हुए हैं। सुरंग में पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए विशेष उपकरण का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि अधिकारियों को उम्मीद है कि सुरंग के अंदर कुछ लोग जिंदा होंगे। लेकिन अभी तक उनका किसी से संपर्क नहीं हो पाया है।
राहत कार्य में 600 जवानों की टीम लगी है
भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के 600 से अधिक कर्मियों को खोज और बचाव कार्यों को करने के लिए चमोली में तैनात किया गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बाढ़ के परिणामस्वरूप कटे हुए दूरदराज के गांवों में राशन, दवा और अन्य जरूरी सामान पहुंचाने के लिए आईटीबीपी के जवानों का शुक्रिया किया। रेनी पल्ली, पांग, लता, सुरैतोता, सूकी, भालगांव, तोलमा, फगरासु, लॉन्ग सेगड़ी, गहर, भानग्युल, जुवागवाड और जुग्गू गांवों में सड़क संपर्क प्रभावित है।
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