
नई दिल्ली. अयोध्या मामले पर मुस्लिम पक्ष के बाद अब हिंदू पक्ष की ओर से पहली पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। इस याचिका में मांग की गई है कि मुसलमानों को दी 5 एकड़ वापस ली जाए और बाबरी विध्वंस को गैरकानूनी बताने की टिप्पणी भी हटाई जाए।
यह याचिका अखिल भारत हिन्दू महासभा की ओर से पेश की गई है। इस याचिका में बाबरी मस्जिद विध्वंश को लेकर की गईं सख्त टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि इन टिप्पणियों से निचली अदालत में चल रहा ट्रायल प्रभावित होगा।
मुस्लिम पक्ष ने फैसले के विरोध में 8 याचिका दाखिल कीं
इससे पहले अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की ओर से अब तक 8 याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन्हें ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का भी समर्थन है। ये याचिकाएं मौलाना मुफ्ती हसबुल्लाह, मौलाना महफूज उर रहमान, मोहम्मद उमर, रिजवान, हाजी महबूब, मिसबाउद्दीन, असद और अयूब की ओर से दायर की गई हैं।
9 नवंबर को सुनाया था फैसला
दशकों से चल रहे अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को फैसला सुनाया था। इस फैसले में पांच जजों की बेंच ने एकमत में कहा था कि विवादित जगह का रामलला को मालिकाना हक मिलना चाहिए। इसके अलावा कोर्ट ने कहा था कि मुस्लिमों को मस्जिद के लिए 5 एकड़ जमीन अलग से दी जाए। साथ ही कोर्ट ने मंदिर के लिए सरकार से तीन महीने में ट्रस्ट भी बनाने के लिए कहा था।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने किया विरोध
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का विरोध किया था। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने के लिए कहा था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं। इन्हें पर्सनल लॉ बोर्ड ने समर्थन किया है। हालांकि, सुन्नी बक्फ बोर्ड और एक अन्य मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने याचिका दाखिल करने से इनकार कर दिया था।
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