
नई दिल्ली. निर्भया से गैंगरेप फिर हत्या के दोषी अक्षय की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 17 दिसंबर को दोपहर 2 बजे सुनवाई करेगा। चार दोषियों में से तीन की पहले ही पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई है। 3 जजों की बेंच ने पहले फैसला दिया था, इसलिए फांसी के मामलों में तय प्रक्रिया के मुताबिक 3 जज खुली अदालत में याचिका को सुनेंगे।
अक्षय की पुनर्विचार याचिका में क्या तर्क?
अक्षय की पुनर्विचार याचिका में वेद, पुराण, उपनिषद का हवाला दिया गया है। याचिका में कहा गया है कि सतयुग और त्रेता युग में लोग हजार साल तक जीते थे। द्वापर युग में भी सैकड़ों साल तक उम्र होती थी। अब कलयुग है। 50 से 60 साल तक की उम्र होती है। फांसी देकर उम्र और छोटी करने की क्या जरूरत है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में बहुत ज्यादा वायु प्रदूषण है। शहर गैस चैंबर बना हुआ है। पानी की क्वालिटी भी बहुत खराब है। इससे लोग वैसे ही मर रहे हैं। फांसी की सजा देने की क्या जरूरत है।
अक्षय के वकील हैं एपी सिंह
दोषी के वकील एपी सिंह ने अक्षय की पुनर्विचार याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि वह गरीब और कमजोर तबके से है। पुनर्विचार याचिका दाखिल करने में देरी पर ध्यान नहीं देना चाहिए। हमने कई तथ्य रखे हैं। एपी सिंह, दोषी पवन और विनय के भी वकील हैं।
9 जुलाई 2018 को तीन की पुनर्विचार याचिका पहले ही खारिज
निर्भया गैंगरेप के चार दोषियों को फांसी होनी है। इनमें से 9 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने विनय, पवन और मुकेश की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। तब अक्षय ने याचिका दाखिल नहीं की थी।
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