
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कहा है कि 1947 में देश का जो बंटवारा हुआ, उससे कोई भी खुश नहीं है। विभाजन ने कभी ना खत्म होने वाला दर्द दिया है जो तभी खत्म होगा जब विभाजन निरस्त होगा। भागवत ने नोएडा में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में कहा कि खून की नदियां न बहे इसके लिए विभाजन के प्रस्ताव को स्वीकार किया गया था। नहीं करते तो जितना खून बहता उससे कई गुणा अधिक खून उस समय बहा और आज तक बह रहा है।
संघ प्रमुख ने कहा कि विभाजन का उपाये ठीक नहीं था। इससे न भारत सुखी है न पाकिस्तान। विभाजन की प्रवृत्ति अलगाव की बात करती है। कहती है कि तुम अलग हो इसलिए साथ नहीं रह सकते। वहीं, भारत की प्रवृत्ति कहती है कि कोई अलग है इसलिए उसे अलग होने की जरूरत नहीं है। भारत की विचारधारा सबको साथ लेकर चलने वाली है। यह अपने को सही और दूसरों को गलत मानने वाली विचारधारा नहीं है।
गुरुनानक जी ने दी थी चेतावनी
भागवत ने कहा कि इस्लामिक आक्रांताओं की सोच इसके विपरीत दूसरों को गलत और अपने को सही मानने वाली थी। पूर्व में यही संघर्ष का मुख्य कारण था। गुरुनानक जी ने हमें इस्लाम के आक्रण को लेकर चेतावनी दी थी लेकिन हम सचेत नहीं हुए थे और इसका ये नतीजा निकला।
अंग्रेजों की सोच भी ऐसी थी और उन्होंने 1857 के विद्रोह के बाद हिंदू-मुस्लिम के बीच विघटन को बढ़ावा दिया। हमें इतिहास पढ़ना और उसके सत्य को वैसे ही स्वीकार करना चाहिए। अगर राष्ट्र को सशक्त बनाना है और विश्व कल्याण में योगदान करना है तो उसके लिए हिंदू समाज को सामर्थ्य बनना होगा।
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