सद्गुरु के फेक वीडियो-फोटो पर हाईकोर्ट सख्त, गूगल को अल्टीमेटम- जानिए पूरा मामला

Published : Oct 21, 2025, 07:15 PM IST
Sadhguru Fake Video Case

सार

Sadhguru Fake Arrest Ads: दिल्ली हाईकोर्ट ने गूगल को आदेश दिया है कि वह सद्गुरु की AI जेनरेटेड फेक तस्वीरों और वीडियो का गलत इस्तेमाल करने वाले विज्ञापनों को रोके। कोर्ट ने गूगल से कहा है कि वह तकनीक का इस्तेमाल कर ऐसे फेक एड्स को ब्लॉक करे। 

Sadhguru Fake Video Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने गूगल को आदेश दिया है कि वह सद्गुरु जग्गी वासुदेव (Sadhguru Jaggi Vasudev) के नाम, फोटो और वीडियो का गलत इस्तेमाल करने वाले AI जेनरेटेड फेक विज्ञापनों को तुरंत रोके। यह फैसला सद्गुरु और ईशा फाउंडेशन (Isha Foundation) की याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने बताया कि गूगल यूट्यूब पर फेक एड्स हटाने में फेल रहा है, जिनमें सद्गुरु की झूठी गिरफ्तारी और नकली निवेश स्कीम्स को बढ़ावा देने वाले वीडियो शामिल हैं।

कोर्ट ने गूगल को दिया सख्त आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट की सिंगल जज बेंच, जस्टिस मनीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने 14 अक्टूबर को कहा कि गूगल को ऐसे विज्ञापन दिखाने से रोकना चाहिए जो सद्गुरु की नकली गिरफ्तारी दिखाते हैं। कोर्ट ने गूगल को निर्देश दिया कि वह अपनी तकनीक का इस्तेमाल करके सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसे फेक एड्स न चलें। अगर गूगल के पास कोई तकनीकी सीमा या आपत्ति है, तो उसे कोर्ट में अफिडेविट दाखिल करना होगा। साथ ही,कोर्ट ने गूगल और ईशा फाउंडेशन को निर्देश दिया कि वे मिलकर चर्चा करें और स्थायी समाधान निकालें, ताकि बार-बार शिकायत करने की जरूरत न पड़े।

गूगल की क्लिकबेट ऐड पॉलिसी क्या है?

कोर्ट के सामने यह भी पेश किया गया कि गूगल की पॉलिसी के मुताबिक, अपराध, गिरफ्तारी या मौत जैसी निगेटिव घटनाओं का विज्ञापन नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन गूगल इसे सही तरीके से लागू नहीं कर रहा था। इंटरमीडिएरी नियमों के तहत, गूगल को ऑटोमेटेड टूल्स या अन्य तकनीकी उपाय अपनाकर ऐसी सामग्री को रोकना जरूरी है, जो पहले कोर्ट के आदेश से हटाई जा चुकी हो।

ईशा फाउंडेशन की याचिका

सद्गुरु और ईशा फाउंडेशन ने पहले भी अनजान चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ याचिका दायर की थी। 30 मई 2025 के आदेश में कोर्ट ने सद्गुरु की व्यक्तित्व अधिकार सुरक्षा (Personality Rights Protection) की और गूगल को निर्देश दिया कि वह ऐसे चैनल और कंटेंट को सस्पेंड, हटाए और डिसेबल करे। हालांकि, इसके बावजूद YouTube पर फेक एड्स में बढ़ोतरी हुई। इनमें झूठी गिरफ्तारी और नकली निवेश योजनाओं को बढ़ावा देने वाले वीडियो शामिल हैं।

फेक विज्ञापन और डिजिटल धोखाधड़ी का खतरा

ये विज्ञापन जनता के भरोसे का फायदा उठाते हैं। लोग ऐसे लिंक पर क्लिक करके अपनी पर्सनल और फाइनेंशियल जानकारी शेयर कर सकते हैं। ईशा फाउंडेशन ने कहा कि ये फेक एड्स सद्गुरु के काम को लगातार नुकसान पहुंचाते है, जनता के भरोसे को कमजोर करती है और डिजिटल कम्युनिकेशन के भरोसे को खतरे में डालती है। ईशा फाउंडेशन ने सभी लोगों से अपील करता है कि वे सतर्क रहें। अगर यूट्यूब पर किसी विज्ञापन या वीडियो में सद्गुरु की नकली गिरफ्तारी दिखाई दे रही हो, तो उसे स्कैम या मिसलीडिंग के रूप में रिपोर्ट करें।

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