
MSP Guarantee: केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई चौथे राउंड की वार्ता में मोदी सरकार की ओर से पांच फसलों पर पांच साल के लिए पुरानी एमएसपी गारंटी के प्रस्ताव को संयुक्त किसान मोर्चा ने खारिज कर दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा, किसान संगठनों का अंब्रेला संस्था है। एसकेएम ने कहा कि पांच फसलों मक्का, कपास और तीन दालों को पुराने एमएसपी पर पांच साल तक की खरीद का प्रस्ताव किसी भी सूरत में किसानों को स्वीकार नहीं है। किसानों ने बुधवार से दिल्ली कूच करने का ऐलान किया है।
संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि केंद्र सरकार का प्रस्ताव किसानों की मांगों और उसके आंदोलन को दिशाहीन करना है। एसकेएम ने कहा कि सरकार का किसानों की मांगों से भटकाने वाला प्रस्ताव किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है। बीजेपी ने 2014 के आम चुनाव के पहले अपने घोषणा पत्र में यह वादा किया था कि सभी 23 फसलों की एमएसपी गारंटी देगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने जोर देकर कहा कि यह खरीद स्वामीनाथन आयोग के सी2+50 प्रतिशत एमएसपी या न्यूनतम समर्थन मूल्य फार्मूले पर आधारित होनी चाहिए न कि मौजूदा ए2+एफएल+50 प्रतिशत पद्धति पर होनी चाहिए।
सरकार के साथ मीटिंग में पारदर्शिता की कमी का आरोप
एसकेएम ने कहा कि किसान प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच चार दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन इन वार्ताओं में पारदर्शिता की कमी सरकार की ओर से साफ दिखी। सरकार की ओर से प्रतिनिधित्व केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, कृषि राज्यमंत्री अर्जुन मुंडा सहित तीन मंत्रियों ने किया।
अन्य मुद्दों की प्रगति भी बताए सरकार…
संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार से कहा कि केंद्र सरकार को किसानों की अन्य मांगों की प्रगति के बारे में भी बात करनी चाहिए और बताना चाहिए कि उसने क्या कदम उठाया है। किसान ऋण माफी, बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं सहित 2020/21 के विरोध प्रदर्शन के दौरान दर्ज किए गए पुलिस मामलों की वापसी के मुद्दों पर भी सरकार को स्पष्ट बात बतानी चाहिए। एसकेएम ने कहा कि फसल बीमा योजना और 60 वर्ष से अधिक उम्र के किसानों को 10,000 रुपये की मासिक पेंशन जैसी मांगों पर भी कोई प्रगति नहीं हुई है। इसके अलावा यूपी के लखीमपुर खीरी में किसानों की मौत के मामले में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी पर मुकदमा चलाने की मांग का भी समाधान नहीं हुआ है।
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