झटकाः सऊदी अरब ने G-20 के नोट से पाकिस्तानी नक्शे के कश्मीर और गिलगित-बाल्तिस्तान हटाया

Published : Oct 28, 2020, 04:56 PM ISTUpdated : Oct 28, 2020, 05:17 PM IST
झटकाः सऊदी अरब ने G-20 के नोट से पाकिस्तानी नक्शे के कश्मीर और गिलगित-बाल्तिस्तान हटाया

सार

सऊदी अरब की सरकार ने रियाद में अगले महीने होने वाली जी-20 समिट (G-20 summit) के लिए एक विशेष नोट जारी कर पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। दरअसल, सऊदी सरकार द्वारा जारी नोट के पिछले हिस्से पर जी-20 में शामिल सभी देशों के नक्शे हैं। इसमें पाकिस्तान के नक्शे में सऊदी ने कश्मीर और गिलगित - बाल्तिस्तान को पाक का हिस्सा नहीं बताया है।

सऊदी. सऊदी अरब की सरकार ने रियाद में अगले महीने होने वाली जी-20 समिट (G-20 summit) के लिए एक विशेष नोट जारी कर पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। दरअसल, सऊदी सरकार द्वारा जारी नोट के पिछले हिस्से पर जी-20 में शामिल सभी देशों के नक्शे हैं। इसमें पाकिस्तान के नक्शे में सऊदी ने कश्मीर और गिलगित - बाल्तिस्तान को पाक का हिस्सा नहीं बताया है। बता दें कि सऊदी ने इन तीनों देशों को स्वतंत्र देश के तौर पर दिखाया है। हालांकि, इमरान सरकार ने इस मामले पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। गौरतलब है कि जी-20 शिखर सम्मेलन अगले महीने 21 और 22 नवंबर को सऊदी अरब के रियाद में आयोजित होगा।

जी-20 की अध्यक्षता करेंगे प्रिंस सलमान
जी-20 समिट की अध्यक्षता सऊदी सरकार की तरफ से प्रिंस सलमान करेंगे। 24 अक्टूबर को इस मौके को यादगार बनाने के लिए सऊदी सरकार ने 20 रियाल का बैंकनोट जारी किया थता। इसमें सामने की तरफ सऊदी किंग सलमान बिन अब्दुल अजीज की फोटो और एक स्लोगन है। इस नोट के पिछले हिस्से में पूरे विश्व का नक्शा है। इस नक्शे में जी-20 में शामिल सभी देशों को अलग-अलग रंगों में दर्शाया गया है।

सऊदी अरब के भारत से करीबी रिश्ते
एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलिस्तीन और कश्मीर पर पाकिस्तान की नीति समान है। हालांकि सऊदी अरब और इजराइल के भारत से काफी करीबी रिश्ते हैं। भारत के प्रधानमंत्री मोदी के पीएम बनने के बाद से प्रिंस सलमान ने अपनी विदेश नीति में भी बड़ा परिवर्तन किया है। पिछले साल कश्मीर से भारत सरकार द्वारा आर्टिकल 370 हटाने के विषय में भी सऊदी सरकार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। सऊदी के साथ दूसरे अरब के देशों ने भी यही किया। इसलिए पाकिस्तान अब नई पैंतरेबाजी की कोशिश में है। वो अपना एक अलग गुट बनाना चाहता है। इसमें उसे चीन और तुर्की दोनों साथ दे रहे है। लेकिन, अमेरिका, इजराइल और सऊदी अरब रणनीतिक महत्व के कारण भारत के साथ बने हुए हैं।

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