
Electoral Bonds: इलेक्टोरल बॉन्ड डिटेल के चुनाव आयोग की वेबसाइट पर प्रकाशित होने के बाद कांग्रेस ने एसबीआई और मोदी सरकार पर बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने कहा कि एसबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 22217 बॉन्ड जारी किए गए थे लेकिन वेबसाइट पर केवल 18817 बॉन्ड ही प्रकाशित हैं। आखिरकार मोदी सरकार किसे बचाने की कोशिश कर रही है। एसबीआई ने 3346 बॉन्ड्स के डिटेल क्यों नहीं उपलब्ध कराए। माकन ने मांग किया कि सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में एक जांच कमेटी गठित हो और बीजेपी का अकाउंट तत्काल फ्रीज किया जाए।
कांग्रेस ने क्या लगाया आरोप?
कांग्रेस ने ट्वीटर हैंडल पर सवाल किया कि कल जब सूची आई तो 2018 से जारी किए गए कुल 22,217 बांड थे लेकिन वेबसाइट पर केवल 18,871 बांड प्राकशित किए गए हैं। 3,346 बांडों का विवरण वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है; एसबीआई ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया है।
कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने पूछा कि वे कौन लोग हैं जिन्हें मोदी सरकार बचाने की कोशिश कर रही है? जांच होनी चाहिए। जांच में आईटी और ईडी छापों को इन बांडों से जोड़ा जाना चाहिए। चुनावी बांड के माध्यम से दान देने वाली अधिकांश कंपनियों पर या तो आईटी या ईडी द्वारा छापा मारा गया है; उन्होंने भाजपा के दबाव में बांड खरीदे।कांग्रेस ने दो मांग की है। पहला-माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जांच कराई जाए और दूसरा-भाजपा के खातों को तत्काल फ्रीज किया जाए।
आधी-अधूरी जानकारी देने पर सुप्रीम कोर्ट की SBI को फटकार
इलेक्टोरल बॉन्ड का पूरा डेटा साझा नहीं करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई को फटकारा। दरअसल, कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को रद्द करने के साथ बैंक को पिछले पांच साल में राजनैतिक दलों को मिले चंदे का सभी डिटेल साझा करने का आदेश दिया था। लेकिन काफी ना-नुकुर के बाद एसबीआई ने अवमानना के खौफ में डिटेल चुनाव आयोग को सौंपे। हालांकि, अभी भी डिटेल्स साझा करने में काफी डॉक्यूमेंट्स मिसिंग है। कोर्ट ने 18 मार्च को अगली सुनवाई में एसबीआई को यह बताने के लिए कहा कि उसने चूक क्यों की है। पढ़िए पूरी खबर…
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