
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस महीने ऑफलाइन हो रही ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) परीक्षा को स्थगित करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि यह एक नीतिगत मामला है। इस पर सरकारी अधिकारियों को फैसला लेना है। इस स्तर पर यदि अदालत हस्तक्षेप करती हैं तो यह अराजकता पैदा करेगा।
कोर्ट ने आदेश दिया कि 5 फरवरी को निर्धारित तिथि से 48 घंटे पहले GATE 2022 परीक्षा को स्थगित करने की याचिका इसकी तैयारी कर रहे छात्रों के जीवन में अराजकता और अनिश्चितता की संभावना दर्शाती है। गेट 2022 शारीरिक रूप से 5, 6, 12 और 13 फरवरी को आयोजित होने वाला है। GATE के 11 उम्मीदवारों की याचिका में शीर्ष अदालत से केंद्र सरकार और IIT-खड़गपुर (GATE के आयोजकों) को COVID-19 मामलों में उछाल के आलोक में परीक्षा स्थगित करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
कोर्ट ने कहा- इस क्षेत्र में अदालत का हस्तक्षेप खतरनाक साबित होगा
कोर्ट ने कहा कि कोई व्यापक कारण नहीं है कि यह अदालत संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते हुए नियामक प्राधिकरणों के कर्तव्यों और कार्यों को समाप्त कर दे, जिन्होंने परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता पल्लव मोंगिया और सतपाल सिंह ने परीक्षा स्थगित करने का अनुरोध किया था। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस तरह से परीक्षा स्थगित करना शुरू नहीं कर सकता है। अब देश में सब कुछ खुल रहा है। हम छात्रों के भविष्य के साथ नहीं खेल सकते। यह एकेडमिक पॉलिसी का मामला है और इन मामलों की जांच अधिकारियों के द्वारा की जानी चाहिए। इस क्षेत्र में अदालत का हस्तक्षेप बहुत खतरनाक होगा।
कोविड का हवाला देकर परीक्षा स्थगित करने की मांग
बता दें कि गेट देने वाले छात्र कोविड -19 महामारी स्थितियों का हवाला देते हुए परीक्षा स्थगित करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि कई छात्र ऐसे भी हैं जो कोविड पॉजिटिव हैं। ऐसे में छात्रों की मांग है कि परीक्षाओं को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया जाए। छात्रों ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से 8 लाख छात्रों के आने से यह स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में छात्रों को परीक्षा में बैठने के लिए लंबी दूरी तय करनी होगी, जो उनके साथ-साथ आम जनता के लिए भी असुरक्षित है।
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