कर्नाटक हाईकोर्ट की एक इमारत पर स्टेट बार काउंसिल का कब्जा है। ऐसी स्थिति में हाईकोर्ट के 200 से अधिक कर्मचारी बेसमेंट में काम करने को मजबूर हैं। हाईकोर्ट ने बार काउंसिल अध्यक्ष को कहा है कि वह बताएं कि यह इमारत कब खाली कर रहे हैं, वर्ना हम आपसे इस इमारत में बैठने की अनुमति वापस ले लेंगे। 

बेंगलुरू। कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka high court) ने राज्य सरकार को हाईकोर्ट बिल्डिंग में जगह की कमी की समस्या का हल निकालने के लिए एक ठोस प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस रितु राज अवस्थी और जस्टिस सूरज गोविंदराज की एक बेंच ने इस बात पर नाराजगी जताई कि राज्य काफी समय से मामले को खींच रहा है। बेंच ने कहा कि यह एक जरूरी मुद्दा है, क्योंकि उच्च न्यायालय को अपने कामकाज के लिए अधिक जगह की जरूरत होती है।
कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के 200 से अधिक कर्मचारी बेसमेंट से काम कर रहे हैं। यह व्यवस्था जारी नहीं रखी जा सकती है।

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बार काउंसलि को भवन खाली करने के निर्देश
चीफ जस्टिस ने कहा कि यह बहुत मुश्किल हो गया है, क्योंकि हाईकोर्ट के कर्मचारी महामारी के बीच एक बेहद अस्वच्छ बेसमेंट में बैठकर अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। यह वाकई बहुत मुश्किल है। पीठ ने कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल से उस भवन को खाली करने को कहा है, जिसपर उन्होंने कब्जा कर रखा है।

चुनाव आयोग भवन में शिफ्ट कर सकते हैं हाईकोर्ट बिल्डिंग
इससे पहले प्रस्ताव दिया गया था कि हाईकोर्ट के कार्यालयों को पुराने चुनाव आयोग भवन और कर्नाटक सरकारी बीमा विभाग (KGID) की बिल्डिंग में शिफ्ट किया जा सकता है। दोनों हाईकोर्ट परिसर के बगल में हैं। 2019 में कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल को तत्कालीन पुराने चुनाव आयोग की इमारत को अपने कार्यालय के रूप में उपयोग करने की अनुमति दी गई थी।

स्टेट बार काउंसिल को कोर्ट परिसर में रहने का अधिकार नहीं 
चीफ जस्टिस ने कहा कि KSBC को अस्थायी अनुमति दी गई थी, और उन्हें हाईकोर्ट परिसर में रहने पर जोर देने का कोई अधिकार नहीं है। राज्य बार काउंसिल किसी अन्य हाईकोर्ट परिसर के भीतर स्थित नहीं हैं। बेंच ने कहा कि यदि कोई सौहार्दपूर्ण समाधान नहीं होता है, तो हाईकोर्ट केएसबीसी को भवन पर कब्जा करने की अनुमति वापस लेने के लिए मजबूर होगा। कोर्ट ने बार काउंसिल के अध्यक्ष को यह बताने का निर्देश दिया कि वे पुराने चुनाव आयोग की इमारत का कब्जा हाईकोर्ट को कब सौंपेंगे। कोर्ट में जगह की तंगी को देखते हुए मामले की फिर से सुनवाई 14 फरवरी को होगी।

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